“अहोई अष्टमी — बहती आँखों से लिखी माँ की पुकार, संतान की दीर्घायु का आशीर्वाद”

अहोई अष्टमी का व्रत और पूजा: स्पर्श करती भावनाओं की कहानी

कार्तिक कृष्ण अष्टमी का दिन हिंदू धर्म में उन स्त्रियों के लिए विशेष महत्व रखता है, जिनकी संतान हर पल उनकी प्रार्थना का केंद्र होती है। आज उस पावन पर्व की कथा-पटकथा आपसे साझा कर रहा हूँ — एक ऐसी अमूल्य श्रद्धा, जो पीढ़ियों से माता की असीम आस्था और स्नेह को स्वर देती आई है।

व्रती स्त्रियाँ सवेरे-सवेरे स्नान कर पवित्र शरीर, मन और वचन तैयार करती हैं। दिनभर निर्जला अथवा सूखे फल-जल से निर्जला व्रत रखती हैं। शाम होते-होते वही पलकें उस ध्यान की ओर कर देती हैं जहाँ दीवार पर पुतली (आठ कोष्ठक) बनाई गई है। उस कोष्ठक के पास सेई (चुहिया) और उसके बच्चों के चित्र अंकित होते हैं — उनकी ममता से जुड़ी एक संवेदनशील संवेदना।

इसके बाद एक चौका (थाली) बनाकर कलश स्थापित किया जाता है। कलश पूजन के पश्चात् दीवार पर बनी पुतली के समक्ष अहोई अष्टमी की पूजा की जाती है। पूजा के बाद दूध-चावल (दूध-भात) का भोग लगाया जाता है और एक कथा सुनाई जाती है, जिसमें देवी अहोई माता की कृपा, माता पार्वती की माता के रूप में अनहोनी को होनी बनाने की शक्ति और अपार मातृशक्ति का स्मरण मिलता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय किसी नगर में एक साहूकार था, जिसकी पत्नी ने मिट्टी खोदते समय अनजाने में एक सेह (चुहिया) के बच्चे को नुकसान पहुँचाया। पश्चात चारों ओर असमय मृत्यु का अँधेरा फैला और साहूकार की स्त्री ने पुत्रों को खो दिया। जब उसने अपनी भीतरी पीड़ा बांटी, तब वृद्ध औरतों ने सुझाव दिया कि वह उसी अष्टमी पर सेह और उसके बच्चों को चित्रित कर पूजन करे। इसी अनुष्ठान के फलस्वरूप उसे सात पुत्रों की प्राप्ति हुई; उसी कथा से यह व्रत लोककथा बन कर आज भी हर वर्ष श्रद्धालुओं द्वारा किया जाता है।

समय बदलने पर आधुनिक युग में, जो स्त्रियाँ खुद दीवारों पर कला चित्रण करने में सक्षम न हों, वे रेडीमेड अहोई चित्र बाजार से ले आती हैं। इन्हें पूजा स्थल पर स्थापित कर विधिपूर्वक पूजन करती हैं। इस नये स्वरूप ने व्रत की संलग्नता को सहज कर दिया है।

इस दिन कुछ स्थानों पर ‘धोबी मारन लीला’ का मंचन भी होता है — यह एक प्रहसनात्मक दृश्य है जिसमें श्रीकृष्ण द्वारा कंस द्वारा भेजे गए धोबी को मारने की लीला प्रस्तुत की जाती है। इस लीला का प्रतीकात्मक अर्थ है — अन्याय के धोबी (दुष्कृतियों) का संहार।

अहोई माता को देवी पार्वती की प्रतिमूर्ति माना जाता है — उस माता रूप को जो अपार शक्ति से ‘अनहोनी को होनी’ में बदल देती है। इस दिन व्रत करने वाली स्त्रियाँ प्रभात-संध्या ध्यान करती हैं, कथा सुनती हैं, भक्ति भावी गीत गाती हैं और अन्त में भगवान से यह वर मांगती हैं — कि उनकी संतान दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि से जीवन व्यतीत करे।

जब चंद्रिका ने आकाशवाणी द्वारा बताये अनुसार विधि-विधान से व्रत रखा, पूजन किया और स्नान कर घर लौटी, तब अहोई माता ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और वरदान प्रदान किया। “तथास्तु!” कहकर माता ने पुत्रों की दीर्घायु की कृपा प्रदान की।

आज भी यही विश्वास इस व्रत को पवित्र बनाता है — कि अगर श्रद्धा और भक्ति अपार हो, यदि मन, वचन, कर्म सच्चे हों, तो माता अवश्य आशीर्वाद देती हैं।
प्रस्तुति – पंडित ध्रुव मिश्र

दिशानिर्देश (Direction):
राष्ट्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परम्पराओं ने हमें यह सिखाया है कि हर पूजा-उपक्रम अपना अर्थ समझकर, श्रद्धा और नियमपूर्वक करना चाहिए। परंपराओं का अनुसरण करते समय विशेष रूप से किसी धार्मिक अनुष्ठान या व्रत को अपनाने से पहले विद्वानों, पूज्य गुरुओं या अपने परिवार के धार्मिक मार्गदर्शक से परामर्श लेना अनिवार्य है। इससे न केवल आपकी श्रद्धा सुबुद्ध हो, बल्कि अनवांछित भूल से बचाव भी होगा।

ये भी पढ़ें –भयमुक्त हो बालक : शिक्षा में बढ़ती हिंसा पर आत्ममंथन जरूरी

ये भी पढ़ें –💫 धीरे मेटाबॉलिज्म, बढ़ता वजन? 💫

ये भी पढ़ें –“भोजन ही भक्ति है: मसालों की पवित्रता से किचन में आए समृद्धि”

Editor CP pandey

Recent Posts

Delhi LPG Crisis: 10-15 दिन बाद भी नहीं मिल रहा गैस सिलिंडर, राजधानी में ‘आश्वासन’ पर चल रही सप्लाई

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी दिल्ली में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर गंभीर…

3 hours ago

UP Weather Alert: आंधी-बारिश से बदला मौसम, नोएडा-गाजियाबाद समेत 39 जिलों में IMD का अलर्ट

UP Weather Alert: प्रदेश में बुधवार को आई तेज आंधी और बारिश के बाद मौसम…

3 hours ago

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने गृह विज्ञान विभाग का किया भ्रमण, स्वास्थ्य मुद्दों पर हुआ मंथन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक…

11 hours ago

अभय मिश्रा के आवास पर रोजा इफ्तार में उमड़ा जनसैलाब

भागलपुर में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l भागलपुर क्षेत्र में समाजसेवी एवं…

11 hours ago

भारतीय ज्ञान परम्परा में आनंदमूर्ति के योगदान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में “श्री श्री आनंदमूर्तिजी का भारतीय ज्ञान…

11 hours ago