नेपाल के बाद पाकिस्तान में Gen-Z का गुस्सा फूटा, जानें कौन-कौन से देश इस नई पीढ़ी से डरें

Pakistan Protests Gen-Z Movement: नेपाल के बाद अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है. गुरुवार को बड़ी संख्या में जेन-जी (Gen-Z) सड़कों पर उतर आई और शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. बताया जा रहा है कि यह आंदोलन मुजफ्फराबाद विश्वविद्यालय से शुरू हुआ था, जहां छात्रों ने बढ़ी हुई फीस और सुविधाओं की कमी के खिलाफ आवाज उठाई. धीरे-धीरे यह विरोध पूरे क्षेत्र में फैल गया और नई पीढ़ी सरकार के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आई.

कौन हैं Gen-Z?

Gen-Z यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी वह पीढ़ी जो इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में पली-बढ़ी है. यह युवा वर्ग पारंपरिक राजनीति में नहीं बल्कि बदलाव की राजनीति में विश्वास रखता है. यही वजह है कि अब यह पीढ़ी पुराने सिस्टम को चुनौती देने लगी है. पाकिस्तान में इनका आक्रोश सिर्फ सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसने वर्षों से युवाओं की आवाज को दबाए रखा है.

नेपाल, श्रीलंका से लेकर अमेरिका तक फैला आंदोलन

Gen-Z का यह उभार केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है. नेपाल में इसी पीढ़ी ने भ्रष्टाचार और राजनीतिक अक्षमता के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था. श्रीलंका में आर्थिक संकट के दौरान सबसे पहले सड़कों पर उतरने वाले भी यही युवा थे. वहीं अमेरिका, फ्रांस और ईरान में भी जेन-जी सोशल मीडिया और संसद दोनों जगह अपनी आवाज बुलंद कर रही है.

अब किन देशों को डरना चाहिए Gen-Z से?

  1. इंडोनेशिया और म्यांमार:
    इन देशों में जेन-जी सैन्य और धार्मिक नियंत्रण से असहज है. म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली को लेकर युवा पहले ही सशस्त्र विरोध कर चुके हैं, जबकि इंडोनेशिया में इंटरनेट सेंसरशिप के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है.
  2. नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका:
    अफ्रीकी देशों में भी जेन-जी सबसे मुखर है. नाइजीरिया के #EndSARS आंदोलन ने साबित कर दिया कि यह पीढ़ी अब जवाब चाहती है. दक्षिण अफ्रीका में गरीबी और असमानता के खिलाफ युवा एकजुट हो रहे हैं.
  3. ब्रिटेन और जर्मनी:
    यूरोप के ये देश भी इससे अछूते नहीं हैं. यहां Gen-Z जलवायु परिवर्तन, सामाजिक न्याय और रोजगार जैसे मुद्दों पर सड़कों पर उतर रही है. आने वाले वर्षों में यह राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है.
  4. तुर्किए, ब्राजील और मेक्सिको:
    तुर्किए में आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक नियंत्रण को लेकर युवाओं में गुस्सा बढ़ रहा है. ब्राजील और मेक्सिको में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के कारण भी जेन-जी के आंदोलन की संभावनाएं बढ़ रही हैं.
  5. अमेरिका और यूरोप:
    हालांकि यहां लोकतंत्र मजबूत है, लेकिन नस्लीय असमानता, शिक्षा, पर्यावरण और बेरोजगारी जैसे मुद्दे नई जनरेशन को सड़कों पर लाने की क्षमता रखते हैं.

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नतीजा

Gen-Z अब सिर्फ सोशल मीडिया की आवाज नहीं रही, बल्कि बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है. नेपाल से पाकिस्तान तक, यह पीढ़ी सत्ता के ढांचे को हिला रही है और आने वाले समय में कई देशों में इसका असर और गहरा दिख सकता है.

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Karan Pandey

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