(बलिया से घनश्याम तिवारी की रिपोर्ट)
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।
बांसडीह शिक्षा क्षेत्र में शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में किए गए समायोजन के तहत 17 प्राथमिक विद्यालयों का अन्य विद्यालयों में विलय कर दिया गया है। इस निर्णय का सबसे बड़ा असर डुहीजान गांव पर पड़ा है, जहां अब कोई भी प्राथमिक विद्यालय शेष नहीं रह गया है। लगभग दो हजार की आबादी वाला यह गांव अब पूरी तरह विद्यालयविहीन हो गया है।
डुहीजान के बच्चों को अब पढ़ाई के लिए करीब एक से दो किलोमीटर दूर स्थित शाहपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय बनकट जाना पड़ेगा, जिसे डुहीजान के बच्चों के लिए नामित किया गया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि इतनी दूरी तय कर छोटे बच्चों का प्रतिदिन स्कूल जाना बेहद कठिन होगा, विशेषकर बरसात और भीषण गर्मी के मौसम में।
स्थानीय निवासी इस निर्णय से आहत हैं और उन्होंने शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए डुहीजान में पुनः कोई विद्यालय संचालित किया जाए या वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
डुहीजान में पुनः प्राथमिक विद्यालय की बहाली जब तक स्थायी समाधान न हो, अस्थायी स्कूल या शिक्षक की तैनाती बच्चों के लिए परिवहन सुविधा की व्यवस्था ग्रामीणों का यह भी कहना है कि एक ओर सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘शिक्षा सबके लिए’ की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के निर्णय गांवों में शिक्षा व्यवस्था को पीछे धकेल रहे हैं।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मांग को कितनी गंभीरता से लेता है और बच्चों के भविष्य को लेकर क्या कदम उठाता है।
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