GST सुधारों पर बड़ा ऐलान जल्द! दिवाली से पहले हो सकती नई घोषणाएं — नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम का संकेत

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली में बड़े सुधारों की तैयारी चल रही है। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने संकेत दिया है कि दिवाली से पहले जीएसटी सुधारों के नए सेट की घोषणा संभव है। उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 के बाद यह अगला बड़ा कदम होगा, जिससे टैक्स ढांचे को और सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में सुधार होंगे।

नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा के नेतृत्व वाली समिति ने इन सुधारों पर अपनी पहली रिपोर्ट पहले ही सरकार को सौंप दी है। अब उम्मीद की जा रही है कि सरकार दिवाली से पहले इस पर औपचारिक घोषणा कर सकती है।

फिनटेक इनोवेशन पर बोले सुब्रह्मण्यम: “कठोर नियमन से बचें”

सुब्रह्मण्यम ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 में कहा कि नियमन को नवाचार के अनुरूप लचीला बनाना होगा। उन्होंने कहा कि यदि नियम बहुत कठोर हुए तो नवाचार देश से बाहर चला जाएगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि अब संस्था-आधारित नियमन की जगह गतिविधि-आधारित नियमन (Activity-Based Regulation) अपनाने का समय आ गया है।

“अगर नियमन नवाचार को रोकता है, तो नवाचार कहीं और पनपेगा,” — बीवीआर सुब्रह्मण्यम

उन्होंने कहा कि नियामकों को ‘Regulatory Sandbox’ जैसे उपाय अपनाने चाहिए ताकि फिनटेक क्षेत्र में प्रयोग और नवाचार को बढ़ावा मिल सके।

एआई (AI) पर कहा — “चिंता नौकरियों के खत्म होने की नहीं, बल्कि बदलने की है”

सुब्रह्मण्यम ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) दुनिया में एक बड़े परिवर्तन का कारण बन रही है। उन्होंने कहा कि एआई नौकरियों को खत्म नहीं करेगी बल्कि नई प्रकार की नौकरियों को जन्म देगी।
उनके अनुसार, एआई प्रक्रियाओं को अधिक कुशल और उत्पादक बना सकती है, जिससे भारत जैसे देश को दीर्घकालिक लाभ होगा।

पड़ोसी देशों से व्यापारिक संबंध मजबूत करने की जरूरत

नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों जैसे चीन, बांग्लादेश और नेपाल के साथ व्यापारिक संबंध और मजबूत करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए मेक्सिको और कनाडा जैसे पड़ोसी सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, इसलिए भारत को भी इसी तरह की क्षेत्रीय व्यापार व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि चीन एक 18,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था है और भारत उससे पूरी तरह दूरी नहीं बना सकता। हालांकि उन्होंने चीन में निवेश प्रतिबंध पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि चीन भारत के लिए एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना रहेगा।

Karan Pandey

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