पर्यावरण संरक्षण व पारिस्थितिक संतुलन हेतु तमसा तट पर हेमंत पर्व का भव्य आयोजन

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन एवं भारतीय ऋतु परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से जिला पर्यावरण समिति एवं सामाजिक वानिकी वन प्रभाग, मऊ द्वारा तमसा नदी के तट स्थित गाय घाट पर हेमंत पर्व का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल पर्यावरणीय चेतना को जागृत करने का माध्यम बना, बल्कि भारतीय संस्कृति और प्रकृति के आपसी संबंध को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करने में सफल रहा।
भारत एक ऐसा देश है जहाँ विविध परंपराएँ, सभ्यताएँ, विचारधाराएँ और ऋतुएँ सह-अस्तित्व में विकसित हुई हैं। यहाँ की संस्कृति सदैव प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन पर आधारित रही है। भारतीय धार्मिक ग्रंथों, वेदों, उपनिषदों और पुराणों में प्रकृति को माता का दर्जा दिया गया है तथा पर्यावरण संरक्षण एवं पारिस्थितिक संतुलन को मानव जीवन का अनिवार्य अंग माना गया है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक वानिकी वन प्रभाग, मऊ द्वारा भारतीय ऋतु चक्र की महत्ता को जनमानस तक पहुँचाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से “हेमंत पर्व” का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. शर्वेश पाण्डेय, प्राचार्य डी.सी.एस.के. पी.जी. कॉलेज, मऊ, पंडित गिरिजा शंकर त्रिपाठी एवं प्रसिद्ध कवि राम नगीना यादव द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके पश्चात गंगा-तमसा वंदना के माध्यम से प्रकृति और नदियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। इस आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आरंभ ने पूरे वातावरण को भावपूर्ण और प्रेरणास्पद बना दिया।
कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। सोनी धापा बालिका इंटर कॉलेज, डीसीएसके पीजी कॉलेज, तत्वबोध इंटर कॉलेज सहादतपुरा, विक्ट्री इंटर कॉलेज दोहरीघाट, अमृत पब्लिक स्कूल सहादतपुरा, लिटिल फ्लावर स्कूल सिकटिया, सोनी धापा खंडेवाल बालिका इंटर कॉलेज, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, रामस्वरूप भारती इंटर कॉलेज भीटी, जीवन राम इंटर कॉलेज एवं मुस्लिम इंटर कॉलेज, मऊ के विद्यार्थियों ने नृत्य, नाटक, गीत और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं पारिस्थितिक संतुलन का सशक्त संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान बापू इंटर कॉलेज, कोपागंज की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत योग प्रदर्शन ने उपस्थित जनसमूह को विशेष रूप से आकर्षित किया और स्वस्थ जीवन एवं प्रकृति से सामंजस्य का संदेश दिया।
हेमंत पर्व के अंतर्गत मऊ जनपद की चारों रेंजों में अलग-अलग तिथियों पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इनमें पेंटिंग प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, नारा लेखन, प्रश्नोत्तरी, हरित फैशन शो, गोष्ठियाँ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख रहे। इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने पर्यावरणीय समस्याओं, जलवायु परिवर्तन, वृक्षारोपण, नदी संरक्षण एवं स्वच्छता जैसे विषयों पर अपने विचार रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सर्वेश पाण्डेय प्रचार्य डीसीएसके पीजी कॉलेज ने अपने संबोधन में कहा कि
“पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। नदियों, वनों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा किए बिना सतत विकास की कल्पना संभव नहीं है। हेमंत पर्व जैसे आयोजन जनमानस को प्रकृति के निकट लाने और पर्यावरणीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
उन्होंने कहा कि
“पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए जागरूकता के साथ-साथ व्यवहार में परिवर्तन आवश्यक है। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि आने वाली पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर और सजग है। इस प्रकार के कार्यक्रम सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देते हैं।”
कार्यक्रम में उपस्थित प्रभागीय निदेशक पी.के. पाण्डेय ने भी सामाजिक वानिकी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण और जन-जागरूकता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया जा सकता है।
यह आयोजन पर्यावरण निदेशालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा संचालित पारिस्थितिकी विज्ञान एवं पर्यावरण कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरणीय शिक्षा, प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम के तहत जिला पर्यावरण समिति, सामाजिक वानिकी वन प्रभाग, मऊ द्वारा संपन्न कराया गया। कार्यक्रम का संचालन जिला परियोजना अधिकारी द्वारा किया गया तथा सुधीर कन्नौजिया द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
भारतीय पंचांग के अनुसार वर्ष को छह ऋतुओं में विभाजित किया गया है, जिनमें हेमंत ऋतु का विशेष महत्व है। यह ऋतु शरद और शीत के मध्य का समय होती है, जो फसलों की परिपक्वता, प्राकृतिक स्वच्छता एवं मौसमीय संतुलन का संकेत देती है। हेमंत ऋतु प्रकृति में स्थिरता और संतुलन का प्रतीक मानी जाती है। इस ऋतु का महत्व केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरणीय चक्र और जैव विविधता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हेमंत पर्व के आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति, ऋतु चक्र और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को सुदृढ़ करना तथा पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन के रूप में स्थापित करना है। सामाजिक वानिकी वन प्रभाग, मऊ द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जागरूकता बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया गया।

rkpnews@somnath

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