जिस बेटी का कर दिया अंतिम संस्कार, उसी का आ गया फोन! जिंदा थाने पहुंची तो पुलिस के भी उड़ गए होश
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पुलिस और परिवार दोनों को हैरान कर दिया। रेलवे ट्रैक पर मिले एक अज्ञात महिला के शव को मां ने अपनी बेटी अनामिका समझ लिया। पहचान के आधार पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हो गया, पोस्टमार्टम हुआ और परिवार ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। लेकिन कहानी में ऐसा मोड़ आया, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। शाम को उसी बेटी का फोन मां के पास पहुंचा, जिसे वह कुछ घंटे पहले मृत समझकर अंतिम विदाई दे चुकी थीं। इसके बाद बेटी खुद थाने पहुंच गई। उसे जिंदा देखकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। अब सबसे बड़ा सवाल है कि जिस महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया, वह आखिर कौन थी? गोरखपुर के सहजनवां थाना क्षेत्र में सीहापार हाल्ट के पास रेलवे ट्रैक पर एक अज्ञात महिला का शव मिलने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस शव की पहचान कराने में जुटी थी। इसी दौरान सीहापार निवासी लक्ष्मीना देवी थाने पहुंचीं और शव को अपनी बेटी अनामिका का बता दिया। इसके बाद इसी पहचान के आधार पर पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। परिजनों की शिकायत पर अनामिका के पति अभी सिंह, उसके पिता और जेठ के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। लक्ष्मीना देवी का आरोप था कि उनकी बेटी ने नवरात्र के दौरान बेलघाट क्षेत्र के बेली गांव निवासी अभी सिंह से प्रेम विवाह किया था और शादी के बाद ससुराल में दहेज को लेकर उसे परेशान किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके मोबाइल फोन बंद मिले। शव की पहचान अनामिका के रूप में होने के बाद पोस्टमार्टम कराया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार ने गांव के लोगों की मदद से अंतिम संस्कार भी कर दिया। घर में मातम का माहौल था और सभी यही मान रहे थे कि अनामिका अब इस दुनिया में नहीं रही। मगर शाम करीब सात बजे मां के मोबाइल पर अनामिका का फोन आया। बेटी की आवाज सुनकर लक्ष्मीना देवी के होश उड़ गए। कुछ देर बाद रात करीब आठ बजे वह अनामिका को लेकर सहजनवां थाने पहुंचीं। सामने बेटी को जिंदा देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद स्पष्ट हुआ कि रेलवे ट्रैक पर मिले शव की पहचान गलत हुई थी। जिस महिला को अनामिका समझकर अंतिम संस्कार कर दिया गया, उसकी असली पहचान अब भी पुलिस के लिए पहेली बनी हुई है। एसपी उत्तरी राजेश घुनावत के मुताबिक, महिला के शव की वास्तविक पहचान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। शव की तस्वीर आसपास के थानों में भेजी गई है और डीएनए जांच के लिए नमूना भी सुरक्षित रखा गया है। बताया जाता है कि अनामिका की मुलाकात अपनी मौसी के घर आने-जाने के दौरान बेली गांव निवासी अभी सिंह से हुई थी। दोनों के बीच प्रेम संबंध बने और नवरात्र के दौरान उन्होंने शादी कर ली। परिवार की सहमति नहीं मिलने पर दोनों कुछ समय तक अलग-अलग जगहों पर रहे और बाद में लुधियाना चले गए। जानकारी के मुताबिक, बाद में परिवार और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अभी का बड़ा भाई आदर्श दोनों को वापस लेकर आया। बताया जा रहा है कि 22 अक्टूबर को अनामिका और अभी के नौसढ़ पहुंचने की जानकारी मायके वालों को मिली थी। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ और मामला बेलघाट थाने तक पहुंच गया। वहां समझौते के बाद थाने के पास स्थित मंदिर में दोनों की दोबारा शादी कराई गई। इसके बावजूद परिवारों के बीच तनाव बना रहा। फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि रेलवे ट्रैक पर मिली महिला कौन थी और उसकी पहचान अनामिका के रूप में कैसे हो गई? पुलिस अब शव की वास्तविक पहचान और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच के बाद ही साफ हो सकेगा कि इस चौंकाने वाली घटना के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है।
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