नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो नेताओं का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता अशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाने के आदेश को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। दोनों नेताओं की ओर से मंगलवार को अधिवक्ता अभिक चिमनी के माध्यम से याचिका दाखिल की गई। पार्टी ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की है।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है। पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने दोनों नेताओं की हिरासत पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें एक मिनट भी जेल में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से नेताओं की स्वतंत्रता सीमित नहीं की जानी चाहिए और न्याय मिलने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि पार्टी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में दोनों नेताओं की रिहाई की मांग करते हुए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की अपील की। पार्टी का कहना है कि मामले में शीघ्र सुनवाई होनी चाहिए, ताकि दोनों नेताओं को राहत मिल सके।
दरअसल, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने सोमवार को सौरव दास और अशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग करते हुए अदालत में दलील दी थी कि दोनों नेताओं की रिहाई से शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। पुलिस की इसी दलील के बीच हिरासत बढ़ाए जाने के फैसले को अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
दोनों नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया और प्रतिबंधित प्रवेश मार्ग से जंतर-मंतर परिसर में दाखिल हुए। आरोप के मुताबिक, दोनों ने परिसर के बंद गेट को पार कर अंदर प्रवेश किया था। बताया गया कि इससे एक दिन पहले जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था।
दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता अशुतोष रांका को हिरासत में लिया था। इसके बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उस समय पुलिस ने अदालत के समक्ष आशंका जताई थी कि रिहा किए जाने पर दोनों नेताओं की ओर से दोबारा अपराध किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब हिरासत की अवधि दो दिन बढ़ाए जाने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है। एक तरफ पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दलील दे रही है, तो दूसरी तरफ CJP के नेता अपनी हिरासत को चुनौती देते हुए राहत की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल, दोनों नेताओं की याचिका पर हाईकोर्ट की सुनवाई और उसके संभावित आदेश पर सबकी निगाहें टिकी हैं। अदालत से राहत मिलने पर उनकी रिहाई का रास्ता खुल सकता है, जबकि आगे की कानूनी प्रक्रिया मामले की दिशा तय करेगी।