Sunday, April 26, 2026
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झालावाड़: स्कूल की छत गिरने से 6 बच्चों की मौत, 15 से अधिक घायल


20 साल पुराने विद्यालय भवन की जर्जर छत ढही, राहत-बचाव कार्य में जुटा प्रशासन

झालावाड़ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क), राजस्थान के झालावाड़ जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में पिपलोदी गांव स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की छत गिर गई, जिससे 6 बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 15 से अधिक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब बच्चे कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय भवन करीब 20 साल पुराना था और उसकी छत पत्थर के भारी स्लैब से बनी थी। सुबह लगभग 10 बजे अचानक पूरी छत भरभरा कर गिर गई, जिससे पूरा कमरा मलबे में दब गया। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग, पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और आपदा राहत दल घटनास्थल पर पहुँचे और बचाव कार्य शुरू किया गया। मलबे में दबे छात्रों को निकालने के लिए जेसीबी और अन्य उपकरणों की मदद ली गई।

घायलों को पास के झालावाड़ जिला अस्पताल और कोटा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जहां कई बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है।
मृतकों की पहचान अभी तक पूरी तरह नहीं हो सकी है, लेकिन सभी मृतक कक्षा 1 से 5 के छात्र बताए जा रहे हैं।

प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने स्कूल भवन की जर्जर स्थिति के बारे में पहले ही कई बार शिकायत करने का दावा किया है, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है कि भवन में दरारें पहले से थीं, इसके बावजूद कक्षाएं जारी थीं।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जताया शोक
राज्य सरकार ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि, तथा घायलों के इलाज का संपूर्ण खर्च वहन करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दे दिए हैं।

जांच के आदेश, ज़िम्मेदार तय होंगे
झालावाड़ जिला कलेक्टर ने बताया कि घटना की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग से भी जवाब तलब किया गया है कि जर्जर भवन में कक्षाएं क्यों चल रही थीं।

समाप्ति
यह हादसा एक बार फिर सरकारी स्कूलों में जर्जर भवनों की स्थिति और रखरखाव की लापरवाही को उजागर करता है। ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और सभी स्कूल भवनों की तत्काल जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं दोहराई न जाएं।

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