नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)दिल्ली के वसंत कुंज स्थित एक प्रतिष्ठित निजी प्रबंधन संस्थान से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने शिक्षा जगत को हिला कर रख दिया है। संस्थान के पूर्व कुलाधिपति और स्वयंभू बाबा कहे जाने वाले 62 वर्षीय स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ स्वामी पार्थसारथी पर दर्जनों छात्राओं ने गंभीर यौन उत्पीड़न और शोषण के आरोप लगाए हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि पिछले 16 वर्षों से यह आरोपी महिलाओं और छात्राओं को अपना शिकार बनाता रहा है।
अश्लील संदेशों से लेकर धमकियों तक का नेटवर्क
छात्राओं के मोबाइल फोन से मिले व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल सबूतों में यह साफ देखा जा सकता है कि आरोपी ने महिला विद्यार्थियों को बार-बार आपत्तिजनक संदेश भेजे। इनमें “बेबी, आई लव यू”, “आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो”, “मैं तुम्हें विदेश ले जाऊँगा, तुम्हें एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ेगा” जैसे मैसेज शामिल हैं। यही नहीं, चैतन्यानंद ने कभी पैसों का लालच देकर तो कभी कम अंक देने की धमकी देकर छात्राओं पर दबाव बनाने की कोशिश की।
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पीड़ित छात्रा की गवाही
21 वर्षीय छात्रवृत्ति पर पढ़ने वाली एक छात्रा ने अपनी एफआईआर में बताया कि आरोपी ने पहली मुलाकात में ही उसे “अजीब नजरों” से देखा और फिर रात के समय लगातार मैसेज भेजना शुरू कर दिए। इनमें उसके रूप-रंग पर भद्दी टिप्पणियाँ और प्रेम प्रस्ताव शामिल थे। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने शिकायत की, तो संस्थान के एसोसिएट डीन ने उल्टा उसे ही आरोपी को जवाब देने के लिए मजबूर किया। यही तरीका अन्य पीड़िताओं के साथ भी अपनाया गया।
सह-आरोपी महिला वार्डन
जांच में यह भी सामने आया है कि संस्थान की तीन महिला वार्डन आरोपी का साथ देती थीं। उनका काम था छात्राओं पर दबाव डालना कि वे बाबा की मांगों को मानें और उसके भेजे गए मैसेज को तुरंत डिलीट कर दें। पुलिस ने इन्हें भी प्राथमिकी में सह-आरोपी बनाया है।
पहले भी दर्ज हो चुके हैं केस
पुलिस का कहना है कि आरोपी मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है और वह लंबे समय से शैक्षिक संस्थानों से जुड़कर अपनी छवि साधु-संत जैसी बनाए हुए था। वर्ष 2009 और 2016 में भी उस पर छेड़छाड़ के मामले दर्ज हुए थे, लेकिन वह कानूनी कार्रवाई से बच निकला। यही कारण था कि उसकी हिम्मत और बढ़ गई और उसने सालों तक महिलाओं का शोषण जारी रखा।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी धाराएँ
वसंत कुंज उत्तर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75(2) (यौन उत्पीड़न), 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाना) और 351(2) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि आगे की जांच में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।
“बाबा” की किताबें और बड़ा नेटवर्क
गौरतलब है कि चैतन्यानंद ने अब तक 28 किताबें लिखी हैं, जिनकी प्रस्तावनाएँ कई बड़ी हस्तियों ने लिखी थीं। इससे उसकी सामाजिक और शैक्षिक साख बनी रही, लेकिन अंदर ही अंदर वह छात्राओं का यौन शोषण करने वाला शिकारी साबित हुआ।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि कैसे शिक्षा और अध्यात्म की आड़ में ऐसे लोग संस्थानों पर कब्जा जमाकर मासूम छात्राओं का शोषण करते रहते हैं और वर्षों तक बच निकलते हैं।
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