दिग्विजय नाथ इंटर मीडिएट कॉलेज में मनायी गयी महाराणा प्रताप की 427वीं पुण्यतिथि

अदम्य साहस व स्वाभिमान के प्रतीक थे महाराणा प्रताप- डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह

महराजगंज ( राष्ट्र की परम्परा )। मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अदम्य साहसी, आन बान, शान, शौर्य तथा स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप थे। उक्त बातें वीर योद्धा महाराणा प्रताप की 427वी पुण्यतिथि पर दिग्विजय नाथ इंटर मीडिएट कालेज चौक बाजार में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डॉ शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि 19 जनवरी 1597 को महाराणा प्रताप की मृत्यु हुई थी। उनका यश रूपी शरीर सदैव जीवित है। भारतीय संस्कृति में उनके बलिदान एवं हिंदुत्व की रक्षा की यशगाथा सदैव जागृत रहेगी। ऐसे अदम्य साहस वाले महाराणा प्रताप अपने साम्राज्य की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार थे। अपने शौर्य व पराक्रम के बल पर ही अकबर जैसे शासक के दांत खट्टे कर दिए। अपने स्वाभिमान के कारण घास की रोटी खाकर हिंदुत्व की रक्षा की। जब अकबर ने महाराणा प्रताप की मृत्यु का समाचार सुना तो वह भी भावुक होकर रो पड़ा। अकबर के साथ युद्ध करके महाराणा प्रताप ने 36 दुर्ग को अपने पराक्रम से वापस कर लिया। दुनिया के इतिहास में मेवाड़ साम्राज्य और महाराणा प्रताप के शौर्य ,पराक्रम, देशभक्ति एवं स्वाभिमान की पराकाष्ठा के लिए सदैव याद किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कुशल शासक अकबर ने महाराणा प्रताप को विभिन्न तरह का प्रलोभन देकर गुलामी स्वीकार कराना चाहा लेकिन महाराणा प्रताप ने कभी अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया। महाराणा प्रताप की प्रेरणा सभी भारतीयों के रग- रग में हैं। यह देश के लिए स्वर्णिम अवसर है। आज भारत को एक नया विश्वास प्राप्त हो रहा है। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक विनोद कुमार विमल ने महाराणा प्रताप के जीवन चरित, कर्तव्य एवं यशोगाथा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संयोजन शैलेश कुमार पटेल एवं संचालन डॉ. राकेश कुमार तिवारी द्वारा किया गया ।आभार व धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ प्रवक्ता जगदंबिका सिंह ने किया। इस दौरान डॉ पंकज कुमार गुप्त, सुनील कुमार, रामसुखी यादव, आशुतोष कुमार , तबारक अली, अखिलेश कुमार मिश्र, दिलीप कुमार पांडेय, शैलेश मधुकर ,भानु प्रताप प्रजापति, सूर्य प्रकाश गुप्त ,समीक्षा त्रिपाठी, सिंपल कुमारी, अमृता सिंह ,राजेंद्र राव, मनोज कुमार, दुर्गेश चतुर्वेदी सहित तमाम छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें।

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