उत्तर भारत में पहली बार 4 कैनसैट की ऐतिहासिक उड़ान, छात्रों ने रचा नया इतिहास”
कुशीनगर/तमकुहीराज (राष्ट्र की परम्परा)उत्तर भारत के इतिहास में सोमवार का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया, जब राष्ट्रीय इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री/कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कंपटीशन 2024–25 के तहत तमकुहीराज के जीरो बंधा स्थित जंगलपट्टी गांव से एक साथ चार कैनसैट की सफल लॉन्चिंग की गई। यह उत्तर भारत में पहली बार हुआ जब छात्र निर्मित उपग्रहों ने वास्तविक उड़ान भरकर भारत के अंतरिक्ष नवाचार का नया अध्याय लिखा।
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सुबह 7:30 बजे देवरिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद शशांक मणि और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने झंडी दिखाकर लॉन्चिंग की औपचारिक शुरुआत की। छठ पर्व को ध्यान में रखते हुए 10 में से केवल 4 कैनसैट लॉन्च किए गए, और सभी उड़ानें शत-प्रतिशत सफल रहीं।
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🌟 उत्साह से लबरेज रहा जीरो बंधा क्षेत्र
जंगलपट्टी के लॉन्चिंग स्थल पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। सुरक्षा के लिए लगभग सवा किलोमीटर का एरिया आरक्षित रखा गया था। राम जानकी मंदिर के पास बनी दर्शक दीर्घा में सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों ने हर उड़ान को तालियों और उत्साह के साथ देखा। जैसे ही कैनसैट पैराशूट के सहारे उतरते, दर्शकों की आँखों में गर्व और रोमांच झलकने लगता था।
🧠 “युवा प्रतिभा को निखारना हमारा लक्ष्य” — डॉ. विनोद कुमार
IN-SPACe निदेशक डॉ. विनोद ने कहा,
“आज हमने उत्तर भारत में पहली बार चार कैनसैट की सफल लॉन्चिंग की। ये सभी लगभग 7000 सेमी क्यूब आकार के छात्र-निर्मित उपग्रह हैं। हमारा लक्ष्य है युवा वैज्ञानिकों को वास्तविक अंतरिक्ष अनुसंधान का अनुभव देना और उन्हें वैश्विक स्तर पर तैयार करना।”
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🇮🇳 “देवरिया से बह रही है नवाचार की हवा” — सांसद शशांक मणि
“यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि देवरिया लोकसभा क्षेत्र से नवाचार की हवा बह रही है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र वैज्ञानिक और तकनीकी नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरेगा।”
🛰️ तकनीकी मॉनिटरिंग और रिकवरी मिशन
लॉन्चिंग के दौरान सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रही। आठ हाई-क्वालिटी कैमरों से मॉनिटरिंग की गई, जबकि जूरी टीम ने रियल-टाइम डेटा एलईडी स्क्रीन पर देखा। नारायणी नदी में गिरे दो कैनसैट को रिकवरी टीम ने तुरंत सुरक्षित किया।
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👩🔬 महिला वैज्ञानिकों की उड़ान
इस प्रतियोगिता में 47 कॉलेजों से आए 600 छात्रों में 133 छात्राएँ शामिल थीं। इन छात्राओं ने कैनसैट के डिज़ाइन, एवियोनिक्स और लॉन्चिंग प्रक्रियाओं में अपनी दक्षता दिखाते हुए STEM क्षेत्र में महिला नेतृत्व की दिशा में मजबूत संदेश दिया।
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🏆 पुरस्कार व प्रतियोगिता की रूपरेखा
कुल 71 टीमें इस प्रतियोगिता में भाग ले रही हैं। विजेता टीमों को पांच-पांच ट्रॉफियाँ और सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। यह वैज्ञानिक महाकुंभ 30 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें शेष 67 कैनसैट और रॉकेट मॉडल लॉन्च किए जाएंगे।
🔍 क्या है कैनसैट?
कैनसैट एक छोटा शैक्षिक उपग्रह मॉडल है, जिसका आकार सोडा कैन जितना होता है। इसे एक किलोमीटर की ऊंचाई तक भेजा जाता है, जहाँ से यह पैराशूट की मदद से उतरते हुए तापमान, दबाव, ऊंचाई और GPS डेटा एकत्र करता है। यह छात्रों को वास्तविक उपग्रह मिशन की तकनीकी प्रक्रिया का अनुभव देता है।
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