साइबर ठगों का नया खेल: सरकारी लाभ का झांसा देकर खाते खुलवाए, लाखों की ठगी; पुलिस ने ऐसे खोली कड़ियां

बिहार में साइबर ठगी का बड़ा खेल: सरकारी योजना के नाम पर खुलवाए खाते, निवेश के लालच में लाखों की लूट; 6 महीने में 1,000 से ज्यादा केस

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार में साइबर ठगी के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं। साइबर अपराधी अब केवल ओटीपी या फर्जी लिंक के जरिए ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड में करने और निवेश के नाम पर कई गुना रिटर्न का लालच देकर बड़ी रकम ऐंठने जैसे नए तरीके भी अपना रहे हैं। पुलिस इन मामलों की जांच के लिए बैंक खातों, पैसों के लेन-देन और डिजिटल सुरागों की मदद ले रही है।
पिछले छह महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च से अगस्त के बीच साइबर ठगी से जुड़े 888 मामले सामने आए। इस दौरान पुलिस ने 65 आरोपियों को गिरफ्तार किया और अलग-अलग मामलों में करीब 92.85 लाख रुपये की रकम वापस कराने में सफलता हासिल की।
मार्च में 132 मामले दर्ज हुए और 5 लाख 70 हजार 853 रुपये रिफंड कराए गए। इस दौरान 7 गिरफ्तारियां हुईं। अप्रैल में 168 मामलों में 19 लाख 70 हजार 503 रुपये की रिकवरी हुई और 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया। मई में 179 मामले सामने आए, जिनमें 19 लाख 84 हजार 112 रुपये वापस कराए गए और 5 गिरफ्तारियां हुईं।
जून में 181 साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हुए। पुलिस ने 9 लाख 54 हजार 857 रुपये की रकम वापस कराई और 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया। जुलाई में मामलों की संख्या घटकर 118 रही, लेकिन रिकवरी बढ़कर 30 लाख 14 हजार 285 रुपये पहुंच गई। इस महीने 18 गिरफ्तारियां हुईं। अगस्त में 110 मामले सामने आए, 7 लाख 90 हजार 48 रुपये वापस कराए गए और 22 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
बिहार में साइबर अपराध का दायरा बढ़ने की तस्वीर हाल के वर्षों के आंकड़ों से भी सामने आती है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में साइबर क्राइम से जुड़े 68,931 मामले दर्ज किए गए थे। 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,17,812 हो गई। 2026 में भी एक लाख से अधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। पटना, नवादा, नालंदा और शेखपुरा को साइबर अपराध से प्रभावित प्रमुख जिलों में गिना जाता है।
पटना साइबर थाना की एसएचओ संगीता कुमारी के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में ठगी का एक नया तरीका सामने आया है। साइबर गिरोह सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों से बैंक खाते खुलवाते हैं। इसके बाद इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को इधर-उधर करने में किया जाता है।
जांच के दौरान एक गांव से सामने आए मामले में पता चला कि एक महिला ग्रामीणों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर बैंक खाते खुलवाने के लिए प्रेरित कर रही थी। कहीं शौचालय निर्माण तो कहीं अनाज उपलब्ध कराने का भरोसा देकर खाते खुलवाए गए। बाद में इन बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किए जाने की जानकारी सामने आई।
साइबर अपराधियों का एक और चर्चित तरीका निवेश के नाम पर ठगी है। इसमें लोगों को कम समय में कई गुना मुनाफा देने का झांसा दिया जाता है। शुरुआत में छोटी रकम निवेश कराकर पीड़ित का भरोसा जीता जाता है। इसके बाद ज्यादा रिटर्न का लालच देकर उससे लगातार बड़ी रकम जमा कराई जाती है। जब पीड़ित को वास्तविकता का पता चलता है, तब तक वह अपनी शुरुआती रकम से कई गुना ज्यादा पैसा गंवा चुका होता है।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक फर्जी दस्तावेजों पर जारी सिम और दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल भी है। ऐसे मामलों में पुलिस बैंक खातों और पैसों के ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़कर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश करती है। जांच के साथ-साथ पुलिस का प्रयास यह भी रहता है कि ठगी की रकम को जल्द से जल्द रोका जाए और संभव होने पर पीड़ित को वापस कराया जाए।
साइबर पुलिस लोगों को लालच में आकर किसी भी निवेश योजना या आकर्षक ऑफर पर भरोसा नहीं करने की सलाह दे रही है। यदि कोई व्यक्ति कम समय में कई गुना रकम देने का दावा करता है तो उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाता, ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
सोशल मीडिया यूजर्स को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। साइबर अपराधी फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों की तस्वीरों और निजी जानकारियों का दुरुपयोग कर सकते हैं। इसलिए अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट या फॉलो रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले प्रोफाइल की वास्तविकता जांचना जरूरी है।
पटना साइबर पुलिस के अनुसार, हर महीने करीब 100 से 150 साइबर अपराध से संबंधित एफआईआर दर्ज हो रही हैं। वहीं, साइबर अपराध की जांच के लिए पुलिस नई तकनीकों और संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ा रही है। पुलिस का जोर अपराधियों तक पहुंचने के साथ-साथ ठगी की रकम को जल्द रोकने और पीड़ितों को राहत दिलाने पर भी है।

Editor CP pandey

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