रामनगर की रामलीला में नहीं हुआ राम-रावण युद्ध
वाराणसी/रामनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। धर्म और आस्था की नगरी काशी में विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला के दौरान एक बेकाबू हाथी ने ऐसा उत्पात मचाया कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी फैल गई। हाथी ने अपने ही महावत को सूंड से उठाकर पटक दिया और उसे कुचलने की कोशिश की। इसके बाद वह रास्ते में खड़े वाहनों, टिन शेड और बिजली के पोल को नुकसान पहुंचाता रहा। कई घंटे तक चले प्रयासों के बावजूद जब हाथी पर काबू नहीं पाया जा सका, तो रामलीला की परंपरा भी प्रभावित हो गई। रविवार को होने वाली राम-रावण युद्ध की लीला नहीं हो सकी। अंत में केवल भगवान श्रीराम की आरती कर कार्यक्रम संपन्न कराया गया। तालाब के पास अचानक बिदका हाथी, महावत पर किया हमला घटना शनिवार सुबह करीब 10:35 बजे पंचवटी मैदान के पास की है। रामलीला में शामिल होने के लिए आजमगढ़ से लाए गए हाथियों में से एक को उसका महावत इजराइल नहलाने के लिए तालाब की ओर ले जा रहा था। इसी दौरान हाथी अचानक बिदक गया और आक्रामक हो उठा। महावत ने उसे नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन हाथी ने सूंड से उठाकर उसे पटक दिया। आरोप है कि उसने महावत को पैरों से कुचलने का भी प्रयास किया। हमले में 26 वर्षीय महावत इजराइल गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर, हाथ और पैर में चोटें आई हैं। उसे उपचार के लिए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। अचानक हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। लोग दूर हटकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। चार बाइकें, टेंपो और बिजली के पोल को पहुंचाया नुकसान महावत पर हमला करने के बाद हाथी का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उसने आसपास खड़ी चार बाइकों को क्षतिग्रस्त कर दिया। एक टेंपो को भी नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा एक मकान के टिन शेड और 33 केवी बिजली लाइन से जुड़े पोल को भी क्षति पहुंचाने की जानकारी सामने आई। हाथी के लगातार उग्र बने रहने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ती गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके में लोगों की आवाजाही रोकने के प्रयास किए। पंचवटी और लंका मैदान की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर आवागमन नियंत्रित किया गया, ताकि हाथी आबादी वाले क्षेत्रों में न पहुंच सके और किसी अन्य व्यक्ति की जान खतरे में न पड़े। वन विभाग के सामने भी खड़ी हुई बड़ी चुनौती सूचना मिलने पर स्थानीय वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन हाथी को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण तत्काल सफलता नहीं मिली। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गोरखपुर चिड़ियाघर की विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया। टीम ने देर रात हाथी को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए। हाथी को पंचवटी और लंका मैदान के बीच स्थित घने बगीचे में रोकने की कोशिश की गई, ताकि वह वहां से निकलकर रिहायशी इलाकों में प्रवेश न कर सके। पुलिस और वन विभाग की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए रहीं। कई घंटे बीत जाने के बाद भी हाथी को काबू करने में मुश्किलें आती रहीं। हाथी के उत्पात से टूट गई रामलीला की परंपरा रामनगर की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट परंपराओं और ऐतिहासिक पहचान के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां रामलीला के विभिन्न प्रसंग पारंपरिक तरीके से आयोजित किए जाते हैं। हाथी के बेकाबू होने से इस बार आयोजन का महत्वपूर्ण प्रसंग प्रभावित हुआ। राम-रावण युद्ध की लीला को लेकर श्रद्धालु और दर्शक प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन हाथी पर नियंत्रण नहीं होने के कारण कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ सका। रात करीब 9:25 बजे कुंवर अनंत नारायण सिंह कार से लंका रामलीला मैदान पहुंचे। इसके बाद भगवान श्रीराम की आरती की गई। युद्ध का मंचन नहीं हो सका। अब सोमवार को रविवार को छूटी लीला भी आयोजित किए जाने की बात कही गई है। पहले भी दो बार उत्पात मचा चुका है हाथी जानकारी के मुताबिक, यह हाथी इससे पहले भी अपने मालिक के घर पर दो बार उत्पात मचा चुका है। करीब छह महीने पहले उसने आजमगढ़ स्थित अपने मालिक के घर में तोड़फोड़ की थी। उस समय हाथी को नियंत्रित करने में लगभग तीन दिन लग गए थे। वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सकों की मदद से उसे इंजेक्शन देकर काबू किया गया था। बताया गया कि बरदह थाना क्षेत्र के असवनिया गांव निवासी जसवंत सिंह उर्फ शिबली सिंह वर्ष 2013 में इस हाथी को बिहार से खरीदकर लाए थे। उस समय हाथी की उम्र करीब सात वर्ष थी। उसकी देखभाल के लिए निजामाबाद थाना क्षेत्र के बैरमपुर गांव निवासी इजराइल को महावत रखा गया था। ग्रामीणों के अनुसार, हाथी अपने मालिक की बात अधिक मानता है। छह-सात वर्षों से रामलीला में आ रहा था हाथी रामनगर की रामलीला में शामिल होने के लिए शिबली सिंह का हाथी पिछले छह-सात वर्षों से आता रहा है। इस बार भी महावत इजराइल नवरात्र के पहले दिन हाथी को लेकर रामनगर पहुंचा था। रामलीला में हाथियों की मौजूदगी आयोजन की पारंपरिक व्यवस्था का हिस्सा रही है। लेकिन इस बार हाथी के अचानक उग्र हो जाने से सुरक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई। घटना ने एक बार फिर बड़े धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों में पशुओं की सुरक्षा, प्रशिक्षित देखरेख, आपातकालीन संसाधनों और भीड़ की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सबसे अहम चिंता घायल महावत के उपचार और हाथी को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने की है, ताकि आगे किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
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