देवरिया में SIR-2026 पर बड़ा सवाल: एक ही मकान में 7 फर्जी मतदाता जोड़ने का आरोप, SDM सदर से जांच की मांग
गौरव कुशवाहा
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)देवरिया SIR-2026 फर्जी मतदाता मामला सामने आने के बाद जिले की चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) के तहत प्रकाशित मतदाता सूची में कथित अनियमितता ने प्रशासनिक तंत्र और जमीनी सत्यापन व्यवस्था की विश्वसनीयता को कटघरे में ला खड़ा किया है।
अबूबकर नगर उत्तरी, वार्ड संख्या-32 स्थित मकान संख्या 501 के निवासी अंजूम रहमान ने आरोप लगाया है कि उनके पते पर बिना किसी भौतिक सत्यापन के 7 फर्जी मतदाता जोड़ दिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वर्ष 2003 की निर्वाचक नामावली में इन नामों का कोई उल्लेख नहीं था, लेकिन देवरिया SIR-2026 की सूची में अचानक इनकी एंट्री दिखाई गई।
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शिकायतकर्ता के अनुसार, SIR-2026 की सूची में उनके मकान को 501 और 501/2 के रूप में दर्शाया गया और उसी पते पर विनोद मद्धेशिया, बिंदू देवी, अशोक कुमार, मंशी देवी, आदित्य सिंह, मीरा सिंह और दुर्गेश कुमार गुप्ता जैसे नाम जोड़ दिए गए। अंजूम रहमान का कहना है कि इन व्यक्तियों से उनका या उनके परिवार का कोई संबंध नहीं है और न ही ये लोग कभी उस मकान में रहते पाए गए।
यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि देवरिया SIR-2026 फर्जी मतदाता मामला सीधे तौर पर चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़ा है। मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद मानी जाती है और यदि उसी में गड़बड़ी हो, तो पूरे चुनावी तंत्र की साख पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
अंजूम रहमान ने इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी दिव्या मित्तल को लिखित शिकायत सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी ने SDM सदर को पूरे प्रकरण की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी देखा जाएगा कि सत्यापन प्रक्रिया में किन स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।
चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सिर्फ एक स्थानीय त्रुटि नहीं बल्कि देवरिया SIR-2026 की प्रक्रिया में संरचनात्मक कमजोरी का संकेत हो सकता है। एक ही पते पर कई फर्जी मतदाताओं का जुड़ना यह दर्शाता है कि बीएलओ स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
फिलहाल, पूरे जिले की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह मामला केवल नाम विलोपन या संशोधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि चुनावी व्यवस्था में भरोसा बहाल करने के लिए प्रशासन कितनी सख्ती दिखाता है। देवरिया SIR-2026 फर्जी मतदाता मामला आने वाले समय में राज्य स्तर पर भी एक बड़ी मिसाल बन सकता है।
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