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किसान बिलखते रहे और पीएम करते रहे सभा

वाराणसी/मिर्जामुराद( राष्ट्र की परम्परा) मेहदीगंज गांव के सैकड़ों किसानों ने 25 अक्टूबर को पीएम के सभा के पहले अपने खेतो मे धान की फसल बोई थी। कर्ज उठाकर फसल को खाद पानी लगाया, तो फसल की हरियाली देखकर मारे खुशी किसानों के दिल कुलाचे भरने लगा था। किसानों ने सोचा था इस बार अनाज बेचकर सिर से कर्ज का बोझा उतार फेकूंगा, लेकिन प्रधानमंत्री की बीते सोमवार की सभा ने सब चौपट कर दिया। प्रशासन ने लहलहाती कच्ची धान की फसल पर हैलीपैड और सभा स्थल बना दिया और फसल के मनमाने दर पर कुछ रुपए का चेक पकड़ा दिए। यह कहते हुए किसानो की आंखो से आंसू बहने लगे है। एक ओर जहां मौसम की बेरुखी और खाद बीज की महंगाई ने अन्नदाताओं के सामने लागत भी नहीं निकलने का संकट खड़ा कर दिया, वही दूसरी ओर रही सही कसर प्रधानमंत्री की सभा ने पूरी कर दी। कहानी मिर्जामुराद क्षेत्र के सभा स्थल मेहदीगंज गांव के ही पीड़ित ऐसे किसानो से जुड़ी हुई है, जो वास्तव में किसान है। देश के अन्नदाता है। यहाँ के किसानो की फसल और उपजाऊ खेत प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की भेंट चढ़ गई। चूंकि फसल बड़ी हो गई थी तो किसानों के खेत मे पीएम के सभा स्थल के साथ हैलीपैड भी बना दिया गया। मीडिया मे चल रही ख़बरों और किसानों की माने तो प्रशासनिक अफसरों ने प्रति बीघा फसल के तीस हजार रुपए देने की पेशकश की गयी थी कच्ची फसल काटने के बाद पटवारी ने केवल 19 हजार 4 सौ रुपए के हिसाब से चेक दिए और कहा प्रति बीघा दस कुंटल ही उपज और एमएसपी दर से ही मुआवज़ा दिया जाएगा। किसानो का कहना है कि पहले तो पटवारी ने झूठ बोलकर उससे बिना लिखित सहमति लिए फिर प्रति बीघा 16 कुंटल उपज और तीस हज़ार के जगह दस कुंटल का ही केवल 19400 रूपये ही चेक दिया। किसानो का कहना है कि सभा स्थल और तीन हैलीपैड बनाने में मजदूरों ने न केवल उनकी उपजाऊ ज़मीन बरबाद कर दिया, बल्कि अब रबी की बुवाई पिछड़ जाएगा साथ ही उपजाऊ जमीन भी चौपट हो जा रहा है। किसानो का कहना है कि इस संबंध में डीएम साहब के सामने भी दुखड़ा रोया गया था, लेकिन उन्होंने भी कोई सुनवाई नहीं की। समतल ज़मीन पर भी बन सकता था हैलीपैड और वर्चुअली कार्यक्रम हो सकता था, सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने बताया कि पास ही राजातालाब सब्ज़ी मंडी के पीछे और जगतपुर में कई बीघा मे फैला ग्राउंड खाली पड़ा है। प्रशासन इसी ग्राउंड में हैलीपैड और सभा स्थल बना सकता था। इससे न केवल किसानो की फसल भी बर्बाद होने से बच जाती, बल्कि ग्राउंड का भी सही से इस्तेमाल हो जाता। लेकिन प्रशासन ने ऐसा नहीं किया किसानो के लहलहाती कच्ची फसलों के खेत को हैलीपैड और सभा के लिए चुना।

Editor CP pandey

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