गाड़ी तोड़ना था या जिंदगी से खेलना? आधी रात घर पर हंगामे का आरोप, धारदार हथियार दिखाकर धमकाने की शिकायत
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। खुखुंदू थाना क्षेत्र में आधी रात गाड़ियों में तोड़फोड़ और धारदार हथियार के साथ धमकाने की शिकायत ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि विवाद से जुड़े लोग पहले भी जानलेवा हमला करने का प्रयास कर चुके हैं और कथित तौर पर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर विवाद करते रहे हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, शिकायतकर्ता केतन कुमार मिश्रा ने आरोप लगाया है कि 25 सितंबर 2026 की रात करीब 12 बजे विजय शंकर मिश्रा निवासी परमिया मिश्र और भोला तिवारी निवासी कटियारी कथित रूप से शराब के नशे में अजय तिवारी के घर के दरवाजे पर पहुंचे वहां खड़ी दोनों गाड़ियो पर ताबड़ तोड़ वार करते तोड़ फोड़ करने लगे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोनों ने वहां खड़ी दो गाड़ियों को निशाना बनाते हुए उनके शीशे क्षतिग्रस्त कर दिए।
तहरीर में वाहन संख्या UP52 BJ 6995 और UP32 DU 4974 के शीशे तोड़ने तथा एक वाहन की बैट्री निकाल ले जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक वाहनों के आगे और पीछे के शीशों को भी नुकसान पहुंचाया गया।
धारदार हथियार दिखाने और धमकी देने का आरोप
शिकायतकर्ता ने तहरीर में आरोप लगाया है कि दोनों व्यक्ति धारदार हथियार लेकर पहुंचे थे और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दे रहे थे। भय के कारण शिकायतकर्ता ने स्वयं को घर के अंदर बंद कर लिया। आरोप है कि इसके बाद दरवाजे पर भी तोड़फोड़ करने का प्रयास किया गया।
पीड़ित पक्ष का यह भी दावा है कि विवाद से जुड़े लोगों की ओर से पहले भी उसे नुकसान पहुंचाने के प्रयास किए गए हैं और कथित रूप से कई बार मारने का असफल प्रयास किया जा चुका है। इसके साथ ही फर्जी मुकदमे में फंसाने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इन पुराने आरोपों की भी पुलिस जांच के बाद ही पुष्टि हो सकेगी।
पुलिस अधीक्षक से गंभीरता से जांच की मांग
घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने खुखुंदू थाने में लिखित तहरीर देकर मामले की जांच, मुकदमा दर्ज करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि मामला केवल गाड़ियों में तोड़फोड़ तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि यदि धारदार हथियार लेकर धमकाने और पूर्व में जानलेवा प्रयास किए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर हो सकता है। परिवार ने पुलिस अधीक्षक से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गंभीरता से जांच कराए जाने तथा खतरे की स्थिति पाए जाने पर सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि आधी रात हुई घटना के पीछे वास्तविक विवाद क्या था, गाड़ियों में नुकसान किसने पहुंचाया और धमकी व हथियार संबंधी आरोपों में कितनी सच्चाई है। पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
खबर में शामिल मारपीट, जान से मारने के प्रयास, फर्जी मुकदमे में फंसाने, धमकी और तोड़फोड़ संबंधी आरोप शिकायतकर्ता की तहरीर पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अंतिम तथ्य पुलिस जांच और साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट होंगे।
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