अमेरिकी दबाव में भारत के फैसले, यह गुलामी नहीं तो क्या है( धीरेंद्र आनन्द मिश्रा)


बलिया (राष्ट्र की परम्परा ) ऑल इंडिया सेवा दल कांग्रेस प्रभारी पश्चिम बंगाल त्रिपुरा अंडमान निकोबार धीरेंद्र आनंद मिश्रा ने केंद्र सरकार की विदेश और व्यापार नीति पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज के भारत में फैसले दिल्ली में नहीं बल्कि वॉशिंगटन के दबाव में होते नजर आ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि गुलाम भारत में फैसले लंदन से होते थे, लेकिन आज क्या भारत के फैसले अमेरिका तय कर रहा है? यह विश्वगुरु बनने के लक्षण हैं या नई तरह की गुलामी?
धीरेंद्र आनंद मिश्रा ने कहा कि यह समझ से परे है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प या अमेरिका यह कैसे तय कर सकता है कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा। पहले अमेरिका के दबाव में भारत को ईरान से तेल आयात बंद करना पड़ा और अब रूस से तेल खरीदने पर रोक लगाई जा रही है। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि भारत सरकार अमेरिका की हर मांग को बिना विरोध स्वीकार कर रही है।उन्होंने कहा कि ईरान और रूस दोनों ही भारत के पुराने मित्र और कठिन समय में साथ देने वाले देश रहे हैं। रूस (तत्कालीन USSR) ने भारत-पाक युद्ध के समय खुलकर भारत का साथ दिया था, जबकि अमेरिका पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा था। रूस की मदद से ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय दबावों का सामना किया, लेकिन आज उसी मित्र राष्ट्र से व्यापार रोकना देश को कमजोर करने वाला कदम है।मिश्रा ने आरोप लगाया कि अमेरिका भारत को रणनीतिक रूप से अलग-थलग करना चाहता है और दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि भारत सरकार इस साजिश को समझने के बावजूद चुपचाप अमेरिकी निर्देशों का पालन कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि यही अमेरिका है जिसने भारतीयों के साथ अमानवीय व्यवहार किया, उन्हें जंजीरों में बांधकर देश से बाहर भेजा और भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए।उन्होंने भाजपा द्वारा प्रचारित ट्रेड डील को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 2014 में जहां 2.5 प्रतिशत टैरिफ था, वह आज कथित कटौती के बाद भी 18 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह अमेरिकी टैरिफ है या भारत की बढ़ती महंगाई, यह जनता खुद समझ सकती हैधीरेंद्र आनंद मिश्रा ने ब्रिटिश शासनकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि तब मैनचेस्टर के कपड़ों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय वस्त्रों पर भारी कर लगाए गए, जिससे भारतीय बुनकर बर्बाद हो गए। आज वही इतिहास दोहराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने विदेशी कपड़ों की होली जलाकर स्वदेशी का संदेश दिया था, लेकिन आज के शासक विदेशी वस्तुओं के मोह में डूबे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग आज सरकार से सवाल पूछ रहे हैं, वही सच्चे देशभक्त हैं। लोकतंत्र में सवाल पूछना देशद्रोह नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में है। सरकार की नीतियों का आंख मूंदकर समर्थन करने वाले ही लोकतंत्र के लिए खतरा हैं।

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