विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2025 बनाम भारतीय डिजिटल जनगणना 2027- डिजिटल तकनीकी क्रांति

भारत में पहली बार डिजिटल जनगणना होगी-घर बैठे खुद भरे जनगणना का फॉर्म-पहली बार सेल्फ एंट्री की सुविधा- सरकार लॉन्च करेगी खास वेब पोर्टल

भारत में 1 मार्च 2027 से शुरू होने वाली जनगणना,कई माइनों से अनोखी होगी-वार्षिक आय, जाति,मकान सहित अनेक व्यक्तिगत जानकारीयों से बहुत कुछ बदल जाने की संभावना

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर यह सर्वविदित है कि भारत दुनियाँ की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है,जो142.6 करोड़ से भी अधिक है व चीन से बहुत आगे निकल गया है, जिसमें युवाओं की संख्या सबसे अधिक है जो भारत की सबसे बड़ी ताकत है, जिनके बल पर आज हम तेजी से विकास कर रहे हैं। आज हम आज हम इस जनसंख्या विषय पर चर्चा करने की बात इस एंगल से कर रहे हैं क्योंकि 7 जुलाई 2025 शाम को सरकार से जानकारी आई कि भारत में 2027 में होने वाली जनगणना डिजिटल माध्यम से होगी,यानें घर बैठे हम खुद जनगणना का फॉर्म मोबाइल या किसी अन्य इंस्ट्रूमेंट पर भर सकते हैं, जिसके लिए सरकार एक पोर्टल लॉन्च करेगी। दूसरी बात शुक्रवार 11 जुलाई 2025 को विश्व जनसंख्या दिवस है, मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र,यह मानता हूं कि भारत में 16 वर्षों के बाद जो डिजिटल जनगणना हो रही है उसमें काफी कुछ बदल जाने की संभावना है,यानें यहजनगणना अनोखी होगी, जिसमें जाति सहित अनेको सवालों की बौछार की जाएगी, जैसे फ्रिज टीवी वाहन प्रॉपर्टी घर मकान रोजगार इत्यादि अनेकों सवाल पूछे जाएंगे,आधार कार्ड की संलग्नता भी होगी, यानें जो लोग अभी संपन्न होते हुए भी, पर्दे के पीछे सरकारी योजनाओं का फायदा लाभ उठा रहे हैं, तथा टैक्स से बाहर हैं, उनकी आर्थिक संपन्नता पर्दे के पीछे ही है,सामने में वे हर क्षेत्र में आरक्षण सुविधा स्कीम,सरकारी योजनाओं का लाभ,जाली जाति कार्ड पर चुनाव लड़ रहे हैं, इत्यादि अनेकों लाभ अपात्र होते हुए भी उठा रहे हैं, इस जनगणना से वो पर्दे के पीछे इंजॉय करने वाले भारी मात्रा में सामने आ जाएंगे व र्टेक्स के दायरे में आ जाएंगे,व इन सभी सुविधाओं के लाभ को बंद करने की नौबत आने की संभावना है,क्योंकि वित्तीय स्लैब के ऊपर दर्ज होंगे,इसलिए टैक्स के दायरे में आ जाएंगे, दूसरी ओर उनको सरकारी सुविधाएं व लाभ समाप्त होने की संभावना बनी रहेगी।चूँकि विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2025 बनाम भारतीय डिजिटल जनगणना 2027, डिजिटल तकनीकी क्रांति के रूप में उभरेगी,इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, भारत में 1 मार्च 2027 से शुरू होने वाली जनगणना,कई माइनों से अनोखी होगी-वार्षिक आय, जाति,मकान सहित अनेक व्यक्तिगत जानकारीयों से बहुत कुछ बदल जाने की संभावना हैँ।
साथियों बात अगर हम 7 जुलाई 2025 को सरकार द्वारा भारत के पहले डिजिटल जनगणना के ऐलान की करें तो,भारत में होने वाली अगली जनगणना को लेकर सरकार ने एक बड़ा ऐलान किया है। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी,जिसमें आम लोग खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए सरकार एक खास वेब पोर्टल लॉन्च करने जा रही है। इसके अलावा, मोबाइल ऐप के जरिए भी जनगणना का काम पूरा किया जाएगा। सरकार ने कहा है कि नागरिक चाहें तो खुद ही अपनी जनगणना की जानकारी वेब पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए दो चरणों में जनगणना होगी। पहला चरण ‘हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस’ यानी घर और मकान की जानकारी, और दूसरा चरण ‘पॉपुलेशन एनुमरेशन’ यानी जनसंख्या की गिनती। दोनों चरणों में लोग खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।कब होगी अगली जनगणना?जनगणना 2026 और 2027 में दो चरणों में होगी। पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा, जिसमें मकानों की गिनती की जाएगी। दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा, जिसमें लोगों की जनसंख्या, जाति और बाकी जरूरी जानकारियां जुटाई जाएंगी। इसके लिए 16 जून 2024 को सरकारी अधिसूचना जारी की गई है। यह आज़ादी के बाद भारत की 8वीं और कुल 16वीं जनगणना होगी। 34 लाख कर्मचारियों को दी जाएगी ट्रेनिंगइतने बड़े काम के लिए सरकार ने देशभर में करीब 34 लाख लोगों को नियुक्त किया है। इन कर्मचारियों को तीन स्तरों पर ट्रेनिंग दी जाएगी। पहले राष्ट्रीय ट्रेनर, फिर मास्टर ट्रेनर और आखिर में फील्ड ट्रेनर इन्हें तैयार करेंगे। हर गांव और शहर को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जाएगा और हर हिस्से के लिए एक कर्मचारी जिम्मेदार होगा। इससे कोई भी घर या व्यक्ति गिनती से न छूटे।.सीमाओं में बदलाव की आखिरी तारीख तय,सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि अगर वे अपने जिलों, तहसीलों या पुलिस थानों की सीमाओं में कोई बदलाव करना चाहते हैं, तो उसे 31 दिसंबर 2025 से पहले कर लें। उसके बाद वही सीमाएं जनगणना में अंतिम रूप से मानी जाएंगी। सीमाएं तय करने के तीन महीने बाद ही जनगणना शुरू की जा सकती है। इससे जनसंख्या गिनती में कोई गड़बड़ी नहीं होगी।
साथियों बात अगर हम डिजिटल जनगणना को समझने की करें तो,भारत की 16वीं जनगणना (2025–27) सबसे पायदान पर डिजिटल होगी, जिसमें हम घर‌ बेठे स्वयं अपना फॉर्म भर सकते हैं।डिजिटल‑इ‑जनगणना क्या है? यह भारत की पहली 100 पेर्सेंट पूर्णतःडिजिटल सेंसेक्स होगी, बिना कागज़ी फॉर्म के,हम घर से ऑफिशियल पोर्टल या मोबाइल ऐप पर आधार ‑लिंकड मोबाइल से लॉगिन कर फॉर्म भर सकते हैं।एक बार हमारा डेटा जमा होने के बाद, एक एनुमरेटर (गणना कर्मचारी) घर पर आकर आपके द्वारा भरी जानकारी की सत्यता की पुष्टि करेगा क्या पूछे जाएंगे?पारंपरिक जनगणना के सवालों (नाम, उम्र, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, रोजगार आदि) के साथ अब वस्तुओं की उपलब्धता (मोबाइल, टीवी, फ्रिज, वाहन) और घरेलू सुविधाएं (स्वच्छता, ईंधन, पेयजल स्रोत) के बारे में भी पूछी जाएगी।अनुमानित संख्या’करीब 34–36 प्रश्न होंगे।प्रक्रिया और टाइमलाइन (1) स्वयं‑नोंदणी-आप घर से ऑनलाइन फॉर्म भरें और ओटीपी के जरिए सत्यापित करें (2) एनुमरेटर सत्यापन-बाद में सरकारी कर्मचारी हमारे पास आकर डेटा की जांच करेंगे और यदि कोई जानकारी अद्यतन करनी हो तो करेंगे। (3) दो टप्पे:फेज (1) (हाउस लिस्टिंग)-अक्टूबर 2026 से हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू‑ काश्मीर, लद्दाख सहित कुछ इलाके शुरू होंगे। फेज (2) (पापुलेशन ऐनुमैरेशन), मार्च 2027 से पूरे देश में।डिजिटल इ‑जनगणना के फायदे(1) सटीकता व तेज डेटा संग्रह- मैनुअल त्रुटियाँ कम होंगी और परिणाम जल्दी मिलेंगे। (2) लागत और पेपर बचत-कागज़, लॉजिस्टिक आदि पर खर्च कम होगा (3) डेटा सुरक्षा-एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म एवं गोपनीयता में बढ़ोतरी।(4)स्मार्ट गवर्नेंस-नीति निर्धारण,कार्य योजना,निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण आदि में वास्तविक समय‑आधारित डेटा का लाभ।हमारा पहचान प्रमाण (आधार या मोबाइल ओटीपी) के साथ जब पोर्टल लाइव होगा, तब फॉर्म भर सकते हैं।यदि इंटरनेट की सुविधा न हो, तो चिंता न करें-एनुमरेटर हमारे घर आएगा।यह पहला मौका है जब आप घर से ही ऑनलाइन फॉर्म भरेंगे और फिर एनुमरेटर सत्यापन करेगा।डिजिटल प्रक्रिया के कारण भविष्य की योजनाओं में आपकी जानकारी समय रहते सरकारी योजनाओं और संसाधनों को और बेहतर तरीके से लक्षित करने में मदद करेगी।
साथियों बात अगर हम शुक्रवार 11 जुलाई 2025 को विश्व जनसंख्या दिवस व 7 जुलाई 2025 को किए गए भारत के पहले डिजिटल जनगणना के ऐलान की तुलना करें तो, विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2025 और पहली बार डिजिटल जनगणना का आपसी संबंध हैँ।
(1) विश्व जनसंख्या दिवस का उद्देश्य-हर साल 11 जुलाई को मनाया जाने वाला विश्व जनसंख्या दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1989 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य जनसंख्या से जुड़े मुद्दों जैसे-स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक समानता, गरीबी, और सतत विकास पर वैश्विक जागरूकता फैलाना है।भारत 2025 में पहली बार डिजिटल जनगणना की तैयारी कर रहा है, जिसमें लोग ऑनलाइन माध्यम से स्वयं अपने परिवार की जानकारी भर सकेंगे। यह डिजिटल साक्षरता,डेटा की सटीकता और रियल टाइम प्रोसेसिंग की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।दोनों के बीच संबंध-जनसंख्या डेटा की सटीकता और अद्यतन जानकारी डिजिटल जनगणना से वास्तविक समय में अद्यतन, गहन और विश्लेषणात्मक जनसंख्या आँकड़े मिल सकेंगे। ये आँकड़े विश्व जनसंख्या दिवस पर जनसंख्या नीति बनाने और सटीक योजना तैयार करने में मदद करेंगे। (2) नीतिगत योजना और संसाधनों का समुचित वितरण,जनसंख्या दिवस पर जनसंख्या विस्फोट, संसाधन वितरण और शहरीकरण जैसे विषयों पर चर्चा होती है। डिजिटल जनगणना से प्राप्त आँकड़ों की मदद से शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार जैसे क्षेत्रों में डेटा आधारित योजना बनाना आसान होगा (3) जनसंख्या वृद्धि की डिजिटल निगरानी, डिजिटल जनगणना के ज़रिए यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा कि किन राज्यों या क्षेत्रों में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है।यह जनसंख्या नियंत्रण नीतियों के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करेगा, जिसे विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष रूप से रेखांकित किया जाता है।(4) सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षाएसगी में स्वास्थ्य, शिक्षा, और समानता जैसे कई लक्ष्य सीधे जनसंख्या से जुड़े हैं।डिजिटल जनगणना इन लक्ष्यों की ट्रैकिंग में मदद करेगी और जनसंख्या दिवस पर इनका विश्लेषण किया जा सकेगा।विश्व जनसंख्या दिवस 2025 और डिजिटल जनगणना के बीच गहरा संबंध है। दोनों का लक्ष्य है,जनसंख्या से जुड़ी जानकारी को बेहतर तरीके से समझना, ताकि सतत, समावेशी और योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित किया जा सके। डिजिटल जनगणना इस दिशा में एक तकनीकी क्रांति है, जो भारत को भविष्य की नीतियों के लिए सशक्त बनाएगी।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन करें इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2025 बनाम भारतीय डिजिटल जनगणना 2027- डिजिटल तकनीकी क्रांतिभारत में पहली बार डिजिटलजनगणना होगी- घर बैठे खुद भरे जनगणना का फॉर्म- पहली बार सेल्फ एंट्री की सुविधा- सरकार लॉन्च करेगी खास वेब पोर्टलभारत में 1 मार्च 2027 से शुरू होने वाली जनगणना कई माइनों से अनोखी होगी-वार्षिक आय,जाति,मकान सहित अनेक व्यक्तिगत जानकारीयों से बहुत कुछ बदल जाने की संभावना हैँ।

–संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया1

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Editor CP pandey

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