पितृपक्ष के अंतिम दिन पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के उपाय

हिंदू धर्म में पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) का विशेष महत्व है। यह काल 16 दिन का होता है और इसे पितरों की तृप्ति एवं आशीर्वाद प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। पितृपक्ष के अंतिम दिन श्राद्ध, तर्पण और पितृ-पूजन का विशेष महत्व होता है, क्योंकि माना जाता है कि इस दिन किया गया श्राद्ध समस्त पितरों तक पहुँचता है और वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करता है।
क्यों महत्वपूर्ण है अंतिम दिन? पितृपक्ष का अंतिम दिन जिसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है, उस दिन यदि किसी कारणवश पूर्व दिनों में श्राद्ध नहीं हो पाया हो तो सभी पितरों के लिए सामूहिक श्राद्ध किया जा सकता है।यह दिन उन पितरों को भी समर्पित होता है जिनके निधन की तिथि अज्ञात हो।इस दिन श्राद्ध करने से पितृ दोष शांत होते हैं और परिवार में शांति व समृद्धि आती है।
पितरों को प्रसन्न करने के प्रमुख प्रश्न क्या केवल तर्पण पर्याप्त है या भोजन भी कराना चाहिए?
– शास्त्रों के अनुसार तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन कराना सभी श्रेष्ठ माने जाते हैं। यदि सब संभव न हो तो कम से कम जल और तिल अर्पित अवश्य करना चाहिए।

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  1. क्या महिलाएँ भी श्राद्ध कर सकती हैं?
    – हाँ, यदि परिवार में पुरुष सदस्य उपलब्ध न हों तो महिलाएँ भी श्राद्ध और तर्पण कर सकती हैं।
  2. पितरों के लिए क्या अर्पित करना चाहिए?
    – जल, तिल, कुश, पका हुआ भोजन (खीर, पूरी, दाल, हरी सब्ज़ियाँ) और फल अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है।
  3. दान का क्या महत्व है?
    – श्राद्ध में दान अनिवार्य माना गया है। अन्न, वस्त्र, धान्य, गौ-दान (यदि संभव हो) और दक्षिणा देने से पितर प्रसन्न होते हैं।
    पितरों को प्रसन्न करने के मंत्र
    श्राद्ध या तर्पण करते समय निम्न मंत्रों का जाप शुभ माना गया है:
  4. तर्पण मंत्र
    ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः ।
    ॐ मातामह्यै स्वधा नमः ।
    ॐ प्रपितामह्यै स्वधा नमः ॥
    इस मंत्र के साथ जल, तिल और कुश अर्पित करें।

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  1. पितृ शांति मंत्र
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
    यह महामृत्युंजय मंत्र पितरों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत फलदायी है।
    आशीर्वाद प्राप्त करने के विशेष उपाय
  2. प्रातः स्नान कर पीपल वृक्ष के नीचे तिल मिश्रित जल अर्पित करें और दीप जलाएँ।
  3. कौओं, गायों, कुत्तों एवं ब्राह्मणों को भोजन कराएँ।
  4. घर में पका हुआ भोजन दक्षिणाभिमुख बैठकर पितरों को अर्पित करें।
  5. ब्राह्मण को दक्षिणा और वस्त्र दान करें।
  6. मन में श्रद्धा और विनम्रता रखें, क्योंकि पितृ केवल भक्ति और सच्ची निष्ठा से प्रसन्न होते हैं।

पितृपक्ष का अंतिम दिन न केवल अपने पितरों को स्मरण करने का अवसर है, बल्कि उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने का दिव्य अवसर भी है। श्रद्धा और आस्था के साथ तर्पण, दान और मंत्रजाप करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को स्वास्थ्य, समृद्धि, संतान सुख एवं धर्म मार्ग पर चलने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

Editor CP pandey

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