राज्य के हर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में अब गूंजेगा ‘वंदे मातरम

योगी सरकार का बड़ा फैसला: अब उत्तर प्रदेश के सभी स्कूलों में अनिवार्य होगा ‘वंदे मातरम’, बोले CM – भारत माता के सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं”

📍 लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम भारत माता के प्रति श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रीय गौरव की भावना को जागृत करेगा। योगी ने यह ऐलान गोरखपुर में आयोजित ‘एकता यात्रा’ कार्यक्रम के दौरान किया।

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उन्होंने कहा कि कुछ लोग आज भी भारत की एकता और अखंडता से ऊपर अपने मत और मजहब को रखते हैं, जबकि ‘वंदे मातरम’ का विरोध किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा, “वंदे मातरम हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, इसके गायन से हर नागरिक में देशभक्ति की भावना प्रबल होगी।”

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योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 1896 से 1922 तक कांग्रेस के हर अधिवेशन में वंदे मातरम गाया जाता था, लेकिन 1923 में जब मोहम्मद अली जौहर अध्यक्ष बने, तो उन्होंने इसका विरोध किया और मंच छोड़ दिया।
उन्होंने दावा किया कि यदि उस समय कांग्रेस ने राष्ट्रीय गीत का सम्मान करते हुए कठोर रुख अपनाया होता, तो शायद भारत का विभाजन टल सकता था।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि 1937 में कांग्रेस ने एक समिति बनाकर वंदे मातरम में संशोधन किया, क्योंकि कुछ छंदों में भारत माता को दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का विरोध भारत की आत्मा पर प्रहार है, और यूपी सरकार इसे लेकर राज्य के हर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में गायन अनिवार्य करेगी।

इसी बीच, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 1937 में वंदे मातरम के महत्वपूर्ण छंदों को हटा देने से “विभाजन की मानसिकता” को बल मिला।
कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने पलटवार करते हुए कहा कि 1937 की कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में महात्मा गांधी, नेहरू, पटेल, सुभाष चंद्र बोस जैसे नेता शामिल थे, और उस निर्णय को रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह से लिया गया था।

वर्तमान विवाद के बीच यूपी सरकार का यह निर्णय न केवल राजनीतिक सरगर्मी बढ़ाने वाला है बल्कि देश में राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर एक नई बहस भी छेड़ रहा है।

Editor CP pandey

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