टीएससीटी देगी दिवंगत शिक्षक शाहनवाज अहमद के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के सीयर ब्लॉक स्थित जीएमएएम इंटर कॉलेज, बिल्थरारोड के दिवंगत शिक्षक शाहनवाज अहमद के परिवार को टीचर्स सेल्फ केयर टीम (TSCT) की ओर से लगभग 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता उनकी पत्नी इशरत जहाँ को दी जाएगी। शाहनवाज अहमद का निधन 15 दिसंबर 2024 को हार्ट अटैक के कारण हो गया था।

रविवार देर शाम टीएससीटी के पदाधिकारी दिवंगत शिक्षक के पिपरौली बड़ागांव स्थित आवास पर पहुंचे और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं। सोमवार से प्रदेशभर के सदस्यों द्वारा उनके बैंक खाते में अंशदान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो 25 दिसंबर तक जारी रहेगी।

चार लाख से अधिक सदस्यों वाली सशक्त शिक्षक संस्था

टीचर्स सेल्फ केयर टीम प्रदेश की एक सशक्त संस्था है, जो शिक्षा अधिकारियों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के हितों के लिए कार्य करती है। संस्था के प्रदेशभर में चार लाख से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। संगठन का मुख्य उद्देश्य किसी सदस्य के असामयिक निधन की स्थिति में उसके परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करना है।

इस माह 20 परिवारों को मिलेगी सहायता

टीएससीटी द्वारा इस माह प्रदेश के 20 दिवंगत सदस्यों के परिवारों को सहायता दी जा रही है, जिसमें शाहनवाज अहमद की पत्नी का नाम भी शामिल है। अनुमान के मुताबिक लगभग 80 प्रतिशत सदस्य, यानी करीब 3 लाख 25 हजार लोग, प्रत्येक परिवार के लिए 15 रुपये 50 पैसे का योगदान करेंगे। इससे हर परिवार को लगभग 50 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

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संगठन ने परिजनों को बंधाया ढांढस

रविवार को टीएससीटी की जिला टीम दिवंगत शिक्षक के घर पहुंची और परिजनों को ढांढस बंधाया। इस दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विवेकानंद ने फोन पर इशरत जहाँ से बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

इस मौके पर जिला संयोजक सतीश सिंह, जिला प्रवक्ता चंद्रशेखर पासवान, जिला मीडिया प्रभारी सतीश मेहता सहित कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

अब तक सैकड़ों परिवारों को मिला सहयोग

उल्लेखनीय है कि टीएससीटी अब तक जिले के सात दिवंगत शिक्षक और शिक्षामित्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान कर चुकी है। वहीं प्रदेश स्तर पर 456 परिवार इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। संस्था की यह पहल शिक्षक समाज में एकजुटता, सहयोग और मानवीय संवेदना का सशक्त उदाहरण पेश कर रही है।

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Karan Pandey

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