भक्ति से हीन योग कसरत मात्र: प्रो. अलका पांडेय
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ द्वारा कुलपति प्रो. पूनम टण्डन के संरक्षण में चल रहे सप्तदिवसीय ग्रीष्मकालीन योग कार्यशाला विषय ’योग एवं आजीविका’ प्रशिक्षण के दूसरे दिन भी प्रतिभागियों की काफी संख्या रही। योग प्रशिक्षण योग प्रशिक्षक डा. विनय कुमार मल्ल के द्वारा दिया गया। ध्यान सहित योग प्रशिक्षण में लगभग 75 लोगों ने भाग लिया। जिसमे एन. एस. एस., योग एवं स्नातक, परास्नातक, शोध छात्र आदि विद्यार्थी एवं अन्य लोग सम्मिलित हुए।
शुक्रवार सायं 3 बजे आनलाइन माध्यम से योग एवं अध्यात्म विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि के स्वागत के साथ शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशलनाथ मिश्र जी के द्वारा हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो. अलका पांडेय, हिन्दी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ रहे। उन्होंने योग पर अपने उद्बोधन में कहा कि आज के समय में योग की अत्यधिक आवश्यकता है। क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी अवसाद ग्रस्त हो रही हैं। प्रो. पाण्डेय ने योग के ज्ञानकाण्ड, उपासना काण्ड, कर्मकाण्ड पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने निष्काम कर्म की चर्चा करते हुए कहा कि उपासना का प्राण भक्ति है और उसका कलेवर योग है। भक्ति से हीन योग कसरत मात्र है। अतः योग से भक्ति को भी जोड़ना है। प्रो. अलका ने योग के चार साधनों – मंत्र, लय, हठ व राजयोग को विस्तृत रुप से व्याख्यायित किया।
इस आनलाइन व्याख्यान में कार्यक्रम का संचालन शोधपीठ के रिसर्च एसोसिएट डॉ. सुनील कुमार द्वारा किया गया। शोधपीठ के सहायक निदेशक डॉ. सोनल सिंह द्वारा मुख्य वक्ता एवं समस्त श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। शोधपीठ के सहायक ग्रन्थालयी डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, शोध अध्येता हर्षवर्धन सिंह, डॉ. कुंवर रणंजय सिंह, चिन्मयानन्द मल्ल आदि उपस्थित रहे। विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के साथ ही विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्य सहित डॉ. कुलदीपक शुक्ल, डॉ. श्रीनिवास मिश्र, प्रिया सिंह आदि जुड़े रहे।
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