टेढीघाट वासियो का छलका दर्द,कब तक आदिवासियों सी जिन्दगी जीते रहेगें

साहब आखिर हम पर कब होगी नजरे इनायत

सतीश पाण्डेय व नीरज मिश्र

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के लक्ष्मीपुर ब्लाक के अंतर्गत ग्राम सभा टेढी घाट विकास के नाम टेढी खीर साबित हो रहा है ।यहां के लोग आघुनिक युग में भी आदिवासियों की तरह जीवन जीने के लिए मजबूर हैं, सारे सरकारी दावे इस गांव पर आकर समाप्त हो जाती हैं। 6000 से अधिक की जनसंख्या वाली आबादी कहलाने वाला यह गांव दो नदियों के बीचों-बीच स्थित है और सोहगी वरवां वन्य जीव प्रभाग की सेंचुरी कही जाने वाली लक्ष्मीपुर रेंज व दक्षिणी चौक एवं पकड़ी रेंज के परिक्षेत्र में घिरी हुई है, चौतरफा जंगलों से घिरे होने के कारण विकास की गति इस गांव तक आकर रुक जाती है।
उल्लेखनीय है कि ग्राम सभा टेड़ी घाट लक्ष्मीपुर ब्लाक का एकमात्र ऐसा गांव है जो विकास के नाम पर वंचित है। यहां के लोगों को जीने के लिए रोटी कपड़ा और मकान तो मिल गया लेकिन विपरीत परिस्थितियों में जिला मुख्यालय के अस्पताल तक जाने के लिए नदी पर कोई पुल नहीं है जिससे लोग आ जा सकें। ग्राम सभा के कुल 10 टोलो को मिलाकर आबादी लगभग 6000 से ऊपर है जिसमें गंगा टोला व अन्य टोला रोहिन नदी के दूसरी छोर पर स्थित है जिससे आने जाने में कठिनाई होती है गांव के टोले ऐसी जगह स्थित है जो चारों ओर से जंगल से घिरा है तथा दो नदियों के बीच में स्थित है रोहिन नदी व मलाव नाला जंगल के बीच से गुजरती है जो 25से30 फीट गहरी है जो बरसात में विकराल रूप धारण कर लेती है ग्रामीणों को जिला मुख्यालय आने के लिए नाव तथा काठ की बनी पुल का सहारा लेना पड़ता है ऐसे में मौत का खतरा बना रहता है।
दूसरी तरफ लक्ष्मीपुर ब्लाक पर जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है बरसात के दिनों में जिगनहवां घाट, कऊहवा ,बैरी ,मुलरिहां,पथरइयां, बेलहवां , बेरीकुडी बसहवां,आदि टोला नदी और जंगल के भयावह रूप के चपेट में रहता है ।
इन आठ टोलो को मिलाकर 2 प्राथमिक विद्यालय स्थित है लेकिन इन विद्यालयों पर आने जाने के लिए अध्यापकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है और शिक्षामित्रों के भरोसे संचालित होता है यही नहीं यहां पर वैवाहिक व मांगलिक कार्यक्रमों में जाने के लिए लगभग 70 किलोमीटर का अतिरिक्त यात्रा भी करना पड़ता है। जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर फरेंदा , फरेंदा से संपत्तिहां पटिया संपत्तिहां संपत्तिहां से 30 किलोमीटर अड्डा बाजार होते हुए टेढी घाट 10 किलोमीटर गंगा घाट की दूरी तय करने के बाद गंगा टेड़ी घाट के टोले पर ही साधन जाता है। उसके बाद नाव व पगडंडी के माध्यम से आप को दोनों पार जाना पड़ता है वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर बागा पार से झुगवां बिलासपुर 8 किलोमीटर व बिलासपुर से जाने के लिए 4 किलोमीटर चलना पड़ता है ऐसे में कुल 20 किलो मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। काठ के पुल से पैदल गुजरना पड़ता हैं वन व पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार ने वन सेंचुरी के समीप व अंदर पक्का निर्माण करने पर रोक लगा रखी है। यही कारण है कि आज चानकी पुल निर्माण होते हुए भी वन क्षेत्र में पक्की सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका जिससे आवागमन आज भी शुरू नहीं हो पाया बताया जाता हैं कि इन 8 टोलों पर निवास करने वाले लोग झोपड़ियों में जीवन बिताने के लिए मजबूर हैं डिलीवरी केस विपरीत अवस्था में अस्पताल जाने के लिए लोगों को चारपाई पर मरीज को लाद कर दो किलोमीटर तक पैदल ही जाना पड़ता है तब कहीं जाकर साधन उपलब्ध होता है। अधिकतर लोग इन परिस्थितियों में रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।इन दोनों मार्ग पर कोई जिम्मेदार अधिकारी भी जाना पसंद नहीं करता है। ग्राम सभा टेड़ी घाट के लोगों का रहन- सहन संघर्षशील जीवन शैली का अद्भुत नजारे की बने घी पेश करता है सब्जी और पशु पालन का मुख्य व्यवसाय है लोग आसपास के बाजारों में ले जाकर बेचते हैं तथा पशुपालन के द्वारा दूध घी, खोवा पनीर दही आदि इनका प्रमुख व्यवसाय है नौतनवां फरेंदा, लक्ष्मीपुर, महाराजगंज, निचलौल ,अड्डा बाजार, सहित तमाम जगहों पर प्रतिदिन की सप्लाई भी की जाती हैं बरसात के मौसम में लोग मौत के मुंह में खेलते हुए इन स्थानों पर अपने आने जाने के लिए मजबूर होते हैं दो नदियों के बीच में स्थित इस गांव के लोग रोहिन नदी को नाव द्वारा पार करके नौतनवां फरेंदा लक्ष्मीपुर आदि जगहों पर जाते हैं दूसरी तरफ मलाव नाला है जिस पर लकड़ी का पुल बनाकर महाराजगंज निचलौल बाजार चौक बाजार के लिए जाते हैं। ऐसे में बरसात के दिनों में अचानक बारिश की वजह से बाढ़ आने की संभावना अधिक रहती हैं। लोग जान पर खेलकर अपने व्यवसाय करने के लिए मजबूर होते हैं यहां की दूध पनीर खोवा घी दही पूरे जनपद में प्रसिद्ध है जो पर्याप्त मात्रा में यहां उपलब्ध हो जाती है। सर्वाधिक पशुपालन यहां की प्रमुख विशेषताएं है।दीनानाथ साहनी उर्फ डेबा ग्राम प्रधान प्रतिनिधि टेढी घाट ने बताया कि विकास के लिए संघर्ष करता रहूंगा। ग्राम सभा में सुविधा उपलब्ध हो इसके लिए आला अधिकारियों से मांग भी किया जाता हैं।जिला मुख्यालय जाने के लिए कई बार महाव नाला मे सीमेंट पाईप डालकर पुल निमार्ण करने का प्रयास किया गया लेकिन वन विभाग के द्वारा रोक लगाने से आज तक उसी तरह पेंडिंग है।

Editor CP pandey

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