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लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)ग्रामीण भारत को सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने के उद्देश्य से 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई “हर घर नल जल योजना” यानी जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) आज भी अपने लक्ष्य से लगभग 20 प्रतिशत पीछे है।
मिशन का लक्ष्य था—हर ग्रामीण घर तक नल द्वारा प्रतिदिन 55 लीटर शुद्ध पेयजल पहुँचाना, परंतु जमीनी सच्चाई अब भी अधूरी है।
आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2019 में मात्र 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन थे, जो उस समय कुल ग्रामीण घरों का करीब 17% था।
फरवरी 2025 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 15.44 करोड़ (करीब 79.74%) तक पहुँच चुकी है। यानी प्रगति तो तेज़ है, मगर 100% कवरेज का लक्ष्य अब भी दूर है।
मिशन की असली चुनौती सिर्फ “कनेक्शन देना” नहीं, बल्कि “नियमित और पर्याप्त जल आपूर्ति” सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रीय स्तर पर किए गए अध्ययन के अनुसार, जहाँ कनेक्शन तो मिल गए हैं, वहाँ भी सिर्फ 80% घरों को नियमित पानी मिल रहा है। कई जगह पाइपलाइन अधूरी हैं, टंकियाँ बनीं पर चालू नहीं हुईं — जिससे “कागज़ों पर सफलता” और “जमीनी सच्चाई” में फर्क साफ नजर आता है।
पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों में कवरेज अब भी 54% के आसपास है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई ग्राम पंचायतों में टंकियाँ बन चुकी हैं, लेकिन पानी की सप्लाई अनियमित है।
उदाहरण के तौर पर सीतापुर जिले के एक गाँव में नई बनी पानी की टंकी गिर गई, जो निर्माण गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल उठाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेयजल की नियमितता और गुणवत्ता दोनों ही स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण से सीधा जुड़ा है। जब पानी नल तक नहीं पहुँचता, तो ग्रामीण महिलाएँ अब भी दूर-दूर तक पानी ढोने को मजबूर हैं।
,“हर घर नल जल” योजना ने ग्रामीण भारत में उम्मीद जगाई है, परंतु सफलता का सफर अब भी अधूरा है।
सरकार को अब न केवल संख्या बढ़ाने, बल्कि सप्लाई की गुणवत्ता, नियमितता और निगरानी पर विशेष ध्यान देना होगा, तभी यह योजना सच में “हर घर की प्यास बुझाने” का सपना साकार कर पाएगी।
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