सुशासन

शिक्षा, सत्ता और संवैधानिक विवेक: भारतीय लोकतंत्र का कठिन प्रश्न

जब पढ़ा खड़ा हो और अनपढ़ बैठा हो: लोकतंत्र में शिक्षा का अपमान डॉ. सत्यवान सौरभ किसी भी सभ्य समाज…

2 weeks ago

आत्ममंथन का समय: क्या सरकारी योजनाएं हकदारों तक पहुँच रही हैं या अपात्रों की ढाल बन चुकी हैं?

राहत या राजनीति?- क्या सरकारी राहत वास्तव में पात्रों तक पहुँच रही है?या राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में व्यवस्था खोखली हो रही…

1 month ago

जनता की अपेक्षाएँ बनाम ज़मीनी सच्चाई — 2025 का लोकतांत्रिक इम्तिहान

वादों की राजनीति से नीति की दिशा तक — बिहार की चुनौतियाँ गोंदिया - वैश्विक स्तरपर दुनियाँ के सबसे बड़े…

3 months ago