82 वर्षीया मरीज़ का शारदा नारायन अस्पताल में घुटने का सफल प्रत्यारोपण

मऊ(राष्ट्र की परम्परा)
मुजफ्फरपुर निवासी मरीज़ की उम्र अधिक होने की वजह से बहुत जगह से ऑपरेशन के लिए मना कर दिया गया था।
घुटने की प्रत्यारोपण सर्जरी में रोगग्रस्त जोड़ को कृत्रिम जोड़ से बदल दिया जाता है, जिससे मरीज अपने कृत्रिम जोड़ की मदद से शारीरिक गतिविधियां और अपने कार्य को कर सकता है। घुटने के प्रत्यारोपण सर्जरी से घुटने के दर्द में राहत मिलती है। सर्जरी की सफलता की दर लगभग 98 प्रतिशत से अधिक है। शारदा नारायन अस्पताल के जोड़ प्रत्यारोपण के विषेशज्ञ डा.राहुल कुमार बताते हैं कि घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी के बाद सफलता की दर के बारे में कई लोगों को गलत धारणा है, हालांकि सर्जरी की सफलता दर मुख्य रूप से कुछ मुख्य मापदंडों पर निर्भर करती है। जैसे कि सर्जरी सफलतापूर्वक करना, सर्जरी के बाद की देखभाल, नियमित फिजियोथेरेपी और संक्रमण से बचने के लिए सर्जन एवं आहार विशेषज्ञ द्वारा निर्धारित आहार का पालन करना। सर्जरी के बाद के परामर्श के दौरान व्यायाम और फिजियोथेरेपी करने की सलाह दी जाती है। देखभाल और व्यायाम पर निर्भर करती है। डॉ राहुल ने कहा कि अधिकांश मरीजों को लगता है कि घुटने के प्रत्यारोपण सर्जरी के बाद उनके घुटने को स्थानांतरित करना असंभव है, लेकिन सर्जरी में केवल रोगग्रस्त जोड़ को कृत्रिम जोड़ से में बदला जाता है, जिससे आप पहले की तरह शारीरिक गतिविधियां और अपने कार्य कर सकते हैं। सर्जरी 15 से 20 साल (औसत उम्र) तक चलती है। सर्जरी की उम्र कृत्रिम जोड़ के प्रकार पर निर्भर करती है। किसी भी सर्जरी की रिकवरी में समय लगता है। घुटने की प्रत्यारोपण सर्जरी के मामले में सैद्धांतिक रूप से रिकवरी का समय 14 दिन है, लेकिन आदर्श रूप से रिकवरी सर्जरी के बाद की देखभाल और व्यायाम पर निर्भर करती है।मुजफ्फरपुर निवासी 82 वर्षीया रामवती देवी का सफल घुटने का प्रत्यारोपण किया गया। मरीज़ की उम्र अधिक होने की वजह से ऑपरेशन के लिए बहुत जगह से मन कर दिया गया था।

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