सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर मंगलवार को उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब कालीघाट स्थित उनके आवास के सामने एक महिला द्वारा कथित तौर पर उन पर झपट्टा मारने की कोशिश किए जाने का मामला सामने आया। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि महिला के पास चाकू था। घटना के बाद पार्टी ने कालीघाट थाने में शिकायत दर्ज कराई है। मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है और पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी मंगलवार शाम करीब छह बजे कालीघाट मिलन संघ की दुर्गा पूजा में शामिल होने और पूजा पंडाल का उद्घाटन करने जा रही थीं। उनके साथ वैश्वानर चट्टोपाध्याय और टीएमसी सांसद डोला सेन भी मौजूद थीं। इसी दौरान एक महिला कथित तौर पर ममता बनर्जी के करीब पहुंची और उन्हें ‘पीसी’ कहकर संबोधित करते हुए झपट्टा मारने की कोशिश की। आरोप है कि इसके बाद महिला सड़क पर लेट गई और गाली-गलौज करने लगी। टीएमसी सांसद डोला सेन ने दावा किया कि महिला नशे की हालत में थी और उसके हाथ में चाकू था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला ने खुद को ममता बनर्जी की भतीजी बताने की कोशिश की। हालांकि, महिला की मंशा और घटनाक्रम से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। कोलकाता पुलिस की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, महिला की पहचान अनुसूआ साहा (38) के रूप में बताई गई है। वह न्यू अलीपुर थाना क्षेत्र के एसएन रॉय रोड की निवासी बताई गई है और वेस्ट पोर्ट थाने में सिविक वॉलेंटियर के तौर पर तैनात होने की जानकारी दी गई है। उसकी नियुक्ति 26 नवंबर 2011 को हुई थी। महिला के पास से चाकू बरामद होने का दावा भी किया गया है। घटना के बाद उसे हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई है। डोला सेन ने पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल टीएमसी सांसद डोला सेन ने आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्होंने मौके पर मौजूद दो पुलिसकर्मियों को पूरे मामले की जानकारी दी। उनके मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने कहा कि वे बंगाल पुलिस के कर्मचारी हैं और कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई नहीं कर सकते। डोला सेन ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों पुलिसकर्मी महिला को किनारे ले गए और उसे चाय पिलाई। इन आरोपों पर संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष सामने आना बाकी है। डोला सेन ने पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए सवाल उठाया कि आखिर ऐसी स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन निभाएगा। उन्होंने इस घटना को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। सुरक्षा के मुद्दे पर आमने-सामने टीएमसी और भाजपा इस घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का नया मोर्चा खोल दिया है। डोला सेन ने भाजपा नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब पूर्व मुख्यमंत्री ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा को लेकर क्या भरोसा किया जाए। वहीं, राज्य के उद्योग मंत्री तापस राय ने टीएमसी सांसद के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर सजग हैं और मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। तापस राय ने ममता बनर्जी के पूर्व कार्यकाल का जिक्र करते हुए टीएमसी नेतृत्व से भी सवाल किए। जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें कालीघाट की इस घटना में चाकू बरामद होने और कथित हमले की कोशिश के आरोपों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खास तौर पर तब, जब आरोपित महिला के पुलिस विभाग से जुड़े होने की बात कही जा रही है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि घटना के समय सुरक्षा में तैनात कर्मियों की भूमिका क्या थी और शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कौन-कौन से कदम उठाए। फिलहाल, घटना से जुड़े आरोपों, महिला की कथित मंशा और पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। राजनीतिक बयानबाजी से अलग, इस प्रकरण में सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और कानून के निष्पक्ष पालन पर सबकी नजरें टिकी हैं। डिस्क्लेमर: खबर में घटना के संबंध में राजनीतिक नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
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