पत्रकार के दु:ख-दर्द के लिए संस्था हमेशा खड़ी है और खड़ी रहेगी: शशिकांत शुक्ला
सीतापुर (राष्ट्र की परम्परा)। सन 2022 मे यूपी श्रमजीवी पत्रकार एसोसिएशन की आधार शिला रखी गयी थी। आज संस्था अपना द्वितीय स्थापना दिवस मना रहा है।
उक्त बातें शुक्रवार को मानपुर स्वामी विवेकानन्द इन्टर कालेज मे भारतीय श्रमजीवी पत्रकार एसोसिएशन के द्वितीय स्थापना दिवस पर संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष शशिकांत शुक्ला ने कही। उन्होंने कहा कि अथक प्रयासों के बाद आज सस्था का राष्ट्रीयकरण हो चुका है तथा का नाम यूपी श्रमजीवी पत्रकार एसोसिएशन से भारतीय श्रमजीवी पत्रकार एसोसिएशन किया गया है तथा संस्था देश के 22 राज्यों मे अपने प्रभारियों की नियुक्ति कर कर चुकी है और इस कार्य का श्रेय हमारे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमित शुक्ला को जाता है। जिन्होने दिन रात एक कर संस्था के विकास का कार्य किया है। मै अपने पत्रकार भाईयों को अवगत कराना चाहूूूॅगा कि उनकी कलम भष्ट्राचार के खिलाफ चलते रहे तथा जनता की समस्याओ को शासन व प्रशासन को रुबरु कराते रहे। यदि उनके रास्ते मे कोई रोड़ा आता है तो उसे हटाने का पूर्ण प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पत्रकारो की समस्याओं के निस्तारण के लिए भारतीय श्रमजीवी पत्रकार एसोसिएशन के पदाधिकारी सदैव तत्पर है और रहेगें। प्रेस की स्वतंत्रता, जो लोकतंत्र की आधारशिला है, पर दुनिया भर में पत्रकारिता पर हमला हो रहा है, जबकि हमें इसकी पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है। स्वतंत्र प्रेस लोकतंत्र की आधारशिला है, जो निर्वाचित राजनेताओं को जवाबदेह बनाए रखने तथा सार्वजनिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आज स्वतंत्रता और लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण स्वतंत्र मीडिया तेजी से खतरे में आ रही है। दुनिया भर में पत्रकारों को डराया-धमकाया जा रहा है, परेशान किया जा रहा है और उन पर हमले किए जा रहे हैं। उन पर निगरानी रखी जा रही है, शारीरिक हिंसा और ऑनलाइन दुर्व्यवहार का सामना किया जा रहा है और कानून और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करके उन्हें सलाखों के पीछे डाला जा रहा है। निर्वाचित प्रतिनिधियों से सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के पत्रकारों के प्रयास, उन्हें राज्य की सत्ता के विरुद्ध खड़ा कर रहे हैं, जो इस प्रकार के सत्य कथन से खतरे में पड़ रही है। कई लोगों को दवाएँ या डॉक्टरों तक पहुँच नहीं मिल पाती है, लेकिन उनके परिवार अक्सर अपने रिश्तेदारों के खिलाफ प्रतिशोध के डर से बोलने से हिचकते हैं। जबकि सत्तावादी राज्य नियमित रूप से पत्रकारों का दमन करते हैं, कोई भी लोकतांत्रिक समाज से मीडिया के लिए सुरक्षित माहौल बनाने और उसे बढ़ावा देने की उम्मीद कर सकता है। हालाँकि, हिंसा और अवरोध से मुक्त मीडिया का माहौल कुछ लोकतांत्रिक समाजों में भी सिकुड़ता हुआ दिखाई देता है। पत्रकारों के सामने जेल ही एकमात्र खतरा नहीं है। भारत में मीडिया के लिए गंभीर खतरे सामने आए हैं, जहाँ पत्रकारों को आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए चुप करा दिया जाता है और जेल में डाल दिया जाता है। कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल पत्रकारों के खिलाफ पुलिस मामले दर्ज करने के लिए किया जाता है, ताकि उनके काम को आपराधिक बनाया जा सके और उन्हें राष्ट्र-विरोधी तत्वों के रूप में कलंकित किया जा सके, जिसके लिए आतंकवाद-रोधी कानूनों से लेकर निवारक निरोध प्रावधानों तक के कई कानूनों का इस्तेमाल किया जाता है, और उन पर कोई भी आरोप दर्ज नहीं किया जाता है, जबकि पत्रकार नियमित रूप से जमानत से इनकार किए जाने के कारण जेल में कष्ट झेल रहे हैं।
श्री शुक्ल ने बताया कि भारतीय श्रमजीवी पत्रकार एसोसिएशन देश की मान्यता प्राप्त संस्था है जो निरन्तर पत्रकारो के हितों में कार्य कर रही है। मै शासन व प्रशासन के प्रतिनिधियो से मांग करता हॅू कि पत्रकारो के हित मे संस्था की माॅगो को स्वीकार किया जाय।
1.गैर अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची जिला सूचना की वेबसाईट पर प्रदर्शित जावें।
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