30 दिन तक हिरासत में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व मंत्री पद से हटेंगे

संसद में ऐतिहासिक विधेयक पेश होने जा रहे

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक नैतिकता और सुशासन के मूल्यों को मज़बूती देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को संसद में ऐसे तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें प्रावधान है कि यदि कोई प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, किसी राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश का मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रहता है, तो वह 31वें दिन स्वतः पद से हटा दिया जाएगा।

विधेयक के मुख्य बिंदु जिन अपराधों में कम से कम पाँच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, उनमें आरोपित और लगातार 30 दिन तक जेल में रहने वाले मंत्री को पद छोड़ना होगा।राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर केंद्रीय मंत्रियों को पद से हटाएँगे।राज्यों में मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल मंत्रियों को हटाएँगे।यदि मुख्यमंत्री ऐसा न करें तो संबंधित मंत्री 31वें दिन से स्वतः पदच्युत माने जाएंगे।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में भी नया खंड (4A) जोड़ा जाएगा, जिसके तहत उपराज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर इसी प्रावधान को लागू करेंगे।

संवैधानिक संशोधन का दायरा संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन का प्रस्ताव।केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू होगी।जम्मू-कश्मीर सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रावधान समान रूप से लागू होगा।

विधेयक का उद्देश्य और कारण केंद्र सरकार ने विधेयक के उद्देश्यों में स्पष्ट कहा है कि वर्तमान में संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किसी मंत्री या प्रधानमंत्री को हटाया जा सके।बयान में कहा गया, “यह अपेक्षित है कि पद पर आसीन मंत्रियों का चरित्र और आचरण किसी भी संदेह की किरण से परे हो।”लगातार हिरासत में रहने वाले मंत्री द्वारा संवैधानिक नैतिकता और सुशासन बाधित हो सकता है।

ऐसे हालात में जनता का अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों पर विश्वास कम होता है।

ऐतिहासिक पहल यह विधेयक जनता के विश्वास की रक्षा और राजनीतिक पदों की गरिमा बनाए रखने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो भारतीय लोकतंत्र में यह एक बड़ी व्यवस्था होगी कि गंभीर आपराधिक आरोपों से घिरे और हिरासत में रहने वाले कोई भी निर्वाचित शासनाध्यक्ष या मंत्री स्वतः ही पद से बाहर हो जाएंगे।

Editor CP pandey

Recent Posts

किश्तवाड़ एनकाउंटर: जैश का सैफुल्लाह ग्रुप खत्म

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हुए किश्तवाड़ एनकाउंटर में मारे गए तीनों आतंकियों की पहचान पूरी…

6 hours ago

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम: केंद्रीय बजट 2026 पर आगरा दक्षिण में व्यापक चर्चा

आगरा दक्षिण में केंद्रीय बजट 2026 पर विशेष चौपाल आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। आगरा में…

6 hours ago

बरहज में बूथों का दौरा: सपा जिला उपाध्यक्ष ने जानी मतदाता सूची की स्थिति

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर रविवार को सभी बीएलओ को अपने-अपने…

10 hours ago

डीएम के निर्देश पर उच्चस्तरीय जांच, आरोपित कर्मचारी निलंबित

देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा)कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या मामला देवरिया में प्रशासन ने त्वरित और सख्त कदम…

11 hours ago

देवरिया में विशेष पुनरीक्षण अभियान तेज, डीएम ने कहा- मतदाता सूची में त्रुटि बर्दाश्त नहीं

देवरिया,(राष्ट्र की परम्परा)।मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान 2026 देवरिया के तहत प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम…

12 hours ago