विश्वविद्यालय में व्यवहारिक शिक्षा को प्राथमिकता: कुलपति प्रो. पूनम टंडन

औद्योगिक भ्रमण से छात्रों को मिली खाद्य प्रसंस्करण व सौर ऊर्जा की व्यावहारिक समझ

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग के एम.एससी. फूड टेक्नोलॉजी चतुर्थ सेमेस्टर के छात्रों ने 03 फरवरी 2026 को शैक्षणिक भ्रमण के तहत देवरिया जनपद के पहाड़पुर स्थित गणपति रोलर्स फ्लोर मिल का दौरा किया। यह भ्रमण विभागाध्यक्ष प्रो. दिव्या रानी सिंह के निर्देशन एवं पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ।
भ्रमण के दौरान छात्रों को गेहूं की प्रोसेसिंग, सफाई, ग्राइंडिंग, पैकेजिंग तथा गुणवत्ता नियंत्रण की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। मिल के प्रोपराइटर अरविंद राय ने औद्योगिक स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण, स्वच्छता मानकों और गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों से संबंधित व्यावहारिक पहलुओं को साझा किया।
छात्रों को उद्योग परिसर में स्थापित सोलर पैनल प्रणाली की कार्यप्रणाली से भी अवगत कराया गया। बताया गया कि किस प्रकार सौर ऊर्जा के माध्यम से मिल में विद्युत आपूर्ति की जा रही है, जिससे ऊर्जा लागत में कमी के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
इसी अवसर पर सोलर पैनल प्रणाली के लिए थर्ड पार्टी निरीक्षण भी संपन्न हुआ। निरीक्षण के दौरान सोलर प्लांट की क्षमता, तकनीकी मानक, संरचनात्मक सुरक्षा और विद्युत उत्पादन से जुड़े बिंदुओं का मूल्यांकन किया गया। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर सौर ऊर्जा से संबंधित सब्सिडी/प्रोत्साहन प्राप्त करने हेतु संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजी जाएगी। यह प्रक्रिया विद्यार्थियों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, सरकारी योजनाओं और औद्योगिक अनुपालन की व्यावहारिक समझ के लिहाज से उपयोगी रही।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने संदेश में कहा कि विश्वविद्यालय में व्यवहारिक शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। औद्योगिक भ्रमण विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक कार्यप्रणाली, गुणवत्ता मानकों और सतत ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विषयों से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ते हैं।
भ्रमण में अतिथि शिक्षिका डॉ. गरिमा यादव की सक्रिय सहभागिता रही। शैक्षणिक भ्रमण में शामिल विद्यार्थियों में अंशु माली, अंशी, राशि गुप्ता, अभिनव, प्रीति यादव और पुण्य प्रताप सिंह प्रमुख रहे।
प्रो. दिव्या रानी सिंह ने कहा कि ऐसे औद्योगिक भ्रमण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि इससे सैद्धांतिक ज्ञान को व्यवहारिक अनुभव, उद्योगगत प्रक्रियाओं और सतत विकास की अवधारणा से जोड़ने का अवसर मिलता है।

rkpNavneet Mishra

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