राजनीतिक तापमान असहनीय , लोकतंत्र पर खतरा: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़


सार्वजनिक जीवन में संयम और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पालन की अपील

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को देश के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि आज का राजनीतिक माहौल भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं है। उन्होंने बेलगाम बयानों और बढ़ते राजनीतिक तापमान को लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए गंभीर खतरा बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की प्राचीन संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप राजनीतिक मर्यादाओं का पालन आवश्यक है। “राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। सत्ता और विपक्ष में बदलाव होता रहता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम एक-दूसरे को दुश्मन मान लें। दुश्मन हमारे सीमापार हो सकते हैं, देश के भीतर नहीं,” उन्होंने कहा।

धनखड़ ने कहा कि आज की राजनीति का तापमान असहनीय हो गया है। “बेलगाम होकर वक्तव्य दिए जाते हैं, यह चिंता का विषय है। विधान मंडलों में आचरण का सर्वोच्च स्तर बनाए रखना होगा, क्योंकि अगर लोकतंत्र के मंदिर में मर्यादाएं नहीं रहीं, तो लोग उसकी ओर देखना छोड़ देंगे।”

पूर्व विधायकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि “सार्वजनिक मस्तिष्क को सही दिशा देने में पूर्व जनप्रतिनिधियों का योगदान आवश्यक है।”

भारत की वैश्विक छवि की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विदेश दौरों के समय दलगत सीमाएं समाप्त हो जाती हैं और केवल ‘भारत’ सामने होता है। उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “आज भारत दुनिया की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। ग्यारह वर्ष पहले देश आर्थिक रूप से नाजुक पांच देशों में गिना जाता था, लेकिन आज दुनिया भारत की आर्थिक प्रगति की मिसाल दे रही है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी कालखंड की तुलना नहीं कर रहे, बल्कि वैश्विक दृष्टिकोण से भारत की उपलब्धियों की बात कर रहे हैं। “हर कालखंड में देश ने प्रगति की है, लेकिन आज भारत जिस स्थिति में है, वह गर्व की बात है। आवेश में उठाए गए राजनीतिक प्रश्न कई बार देश की छवि और अर्थव्यवस्था को गहरा आघात पहुंचाते हैं।”

धनखड़ ने अंत में सभी राजनीतिक दलों से संयम बरतने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि “भारतीयता हमारी पहचान है और राष्ट्रहित हमारा धर्म होना चाहिए।”

Editor CP pandey

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