बलिया में नवजात और धात्री महिलाओं के पोषण पर संकट, पीएचसी-सीएचसी पर नहीं मिल रहा दूध और ब्रेड

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद बलिया में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर प्रसव के बाद धात्री महिलाओं और नवजात शिशुओं को मिलने वाला पौष्टिक आहार—दूध, ब्रेड और हल्का भोजन—उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि मां और नवजात दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी पैदा कर रही है।

स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, संस्थागत प्रसव के बाद प्रसूता महिला को कम से कम 48 घंटे तक स्वास्थ्य केंद्र पर निगरानी में रखा जाना अनिवार्य है। इस दौरान महिला को दूध, ब्रेड, दलिया जैसे पौष्टिक आहार दिए जाने का प्रावधान है, ताकि प्रसव के बाद शरीर की कमजोरी दूर हो और नवजात को पर्याप्त स्तनपान मिल सके। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बलिया के कई पीएचसी और सीएचसी पर यह सुविधा केवल कागजों तक सिमटकर रह गई है।

ग्रामीण इलाकों से आने वाली महिलाओं का आरोप है कि प्रसव के बाद उन्हें न दूध दिया जाता है और न ही कोई पौष्टिक भोजन। कई मामलों में परिजनों को बाहर से दूध, बिस्किट या अन्य खाद्य सामग्री लाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बनता है। कुछ महिलाओं ने यह भी बताया कि प्रसव के कुछ घंटों बाद ही उन्हें घर भेज दिया जाता है, जबकि नियमों के अनुसार इस अवधि में चिकित्सकीय निगरानी बेहद आवश्यक होती है।

ये भी पढ़ें – महामृत्युंजय मंत्र: भय से मुक्ति और चेतना के उत्थान का वैदिक सूत्र

चिंताजनक बात यह है कि सीएचसी जैसे बड़े स्वास्थ्य केंद्रों पर भी हालात अलग नहीं हैं। कहीं रसोई न होने का हवाला दिया जा रहा है, तो कहीं बजट और सप्लाई की कमी बताकर जिम्मेदारी से बचा जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों की कमी और लापरवाही का सीधा असर नवजात शिशुओं की देखभाल पर भी पड़ रहा है। पर्याप्त पोषण न मिलने से धात्री महिलाओं में एनीमिया, कमजोरी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जबकि नवजात का वजन और रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जन्म के बाद के पहले 48 घंटे मां और बच्चे दोनों के लिए सबसे संवेदनशील होते हैं। इस दौरान उचित पोषण और देखरेख न मिलने पर भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा निरीक्षण और निगरानी में लापरवाही बरती जा रही है।

ये भी पढ़ें – Delhi Riots Case: उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, अन्य आरोपियों को मिली जमानत

कुल मिलाकर, बलिया जनपद में प्रसव के बाद दी जाने वाली पोषण व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आती है। जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग तत्काल हस्तक्षेप करे, पीएचसी और सीएचसी पर दूध, ब्रेड और अन्य पोषण सामग्री की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करे तथा लापरवाह कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ प्रसूता महिलाओं और नवजात शिशुओं तक पहुंच सके।

Karan Pandey

Recent Posts

थाना समाधान दिवस में डीएम व एसपी ने सुनीं जन समस्याएं, गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के दिए निर्देश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार एवं पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना…

5 hours ago

नौकरी का सपना दिखाकर लाखों की ठगी,महिला समेत चार गिरफ्तार

सरकारी और निजी संस्थानों में नियुक्ति का झांसा देकर वसूली जाती थी मोटी रकम, फर्जी…

5 hours ago

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश को मिली नई दिशा, नई ऊर्जा और नई पहचान: विजयलक्ष्मी गौतम

केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर उपलब्धियां गिनाईं, वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान में…

5 hours ago

बीबीएयू में बी.टेक. प्रवेश प्रक्रिया शुरू, जेईई मेन्स स्कोर के आधार पर होगा दाखिला

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के…

5 hours ago

मनौना धाम जा रही श्रद्धालुओं से भरी बस खाई में पलटी 30 घायल

शाहजहाँपुर (राष्ट्र की परम्परा )l तिलहर-दातागंज स्टेट हाईवे पर शनिवार सुबह बड़ा सड़क हादसा हो…

5 hours ago

निकोबार द्वीपसमूह को बचाने के लिए कांग्रेसियों ने भलुअनी में चलाया हस्ताक्षर अभियान

भलुअनी/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) शनिवार को स्थानीय नगर के शिव मंदिर परिसर के पास अखिल भारतीय…

5 hours ago