नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की हाथी घोड़ा पालकी-आस्था

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो जयकारो से गूँज उठा पंडाल

जन्मोत्सव पर हुई फूलों की बरसात के बीच हुआ सोहर का गान

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
भगवान विष्णु ने वामन का रूप धारण करके राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांग ली। उन्होंने एक पग में सारी पृथ्वी और दूसरे पग में स्वर्ग लोक को माप लिया। वामनावतार का मुख्य उद्देश्य दैत्यराज बलि का मान मर्दन करना व देवराज इन्द्र को पुनः स्वर्गलोक का राज्य सौंपना था।
ये बातें घटैला चेती गांव में आयोजित सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञानयज्ञ में कथा वाचक आचार्य सूर्य नारायण शुक्ल ने मंगलवार की रात चौथे दिन कहीं। उन्होंने समुद्र मंथन, वामन अवतार व श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा का वर्णन किया। कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। जन्म पर बजे बधाई गीत व भजन पर श्रद्धालुओं ने खूब नृत्य किया। जन्मोत्सव में जब वासुदेव नवजात श्रीकृष्ण को सिर पर लेकर निकलते हैं तो उनकी मनमोहक झांकी को देख श्रद्धालुओं से लगाए गए जयघोष से पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। जन्मोत्सव पर हुई फूलों की बरसात के बीच सोहर गीत का गान हुआ। वासुदेव बने आशुतोष द्विवेदी के सिर पर बाल कृष्ण बनी सांभवी उपाध्याय की झांकी का लोगों ने दर्शन पूजन किया। श्रीकृष्ण जन्म की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भाद्रपद की अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि के समय रोहणी नक्षत्र में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से मथुरा के कारागार में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। कृष्ण जन्म के समय जेल के दरवाजे खुल गये और सभी पहरेदार मूर्छित हो गए। जब अत्याचारी कंस के पापों का बोझ बढ़ गया, तब भगवान श्रीकृष्ण अवतार लेते कंस का वध किए। जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान अवतरित होते हैं। कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। कथावाचक ने श्रीकृष्ण जन्म उत्सव पर नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की समेत विविध भजनों को प्रस्तुत किया तो दर्शक दीर्घा तालियां बजाते हुए थिरकने लगे। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने नवजात श्रीकृष्ण पर फूल बरसाया। जन्मोत्सव पर गाए गए सोहर गीत से माहौल भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर मुख्य यजमान सूर्य नारायण द्विवेदी, मालती द्विवेदी, दुर्गा मिश्र, संतोष द्विवेदी ने श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती उतारी। कथा में मुख्य यजमान सूर्य नारायण द्विवेदी, मालती द्विवेदी, दुर्गा मिश्रा, विनोद यादव, दिनेश चौहान, श्रीप्रकाश पांडेय, डॉ. हरिनारायण त्रिपाठी, सुरेश पांडेय, संतोष द्विवेदी, आचार्य मृत्युंजय कृष्ण शास्त्री, पं. रवि पाठक, संतोष द्विवेदी, रत्नेश द्विवेदी, संतोष उपाध्याय, संकल्प उपाध्याय, रामकुमार दूबे, विजय प्रताप तिवारी, शशिप्रभा द्विवेदी, दिव्या द्विवेदी, वंदना दूबे, अर्चना तिवारी, अनुपमा उपाध्याय, आर्या द्विवेदी, सांभवी उपाध्याय, संगीता, आशुतोष द्विवेदी, हर्ष द्विवेदी, अनुराग तिवारी, रुदल गोंड, प्रतीक दूबे, अभय तिवारी, प्रांजल दूबे, शुभम तिवारी, आशुतोष राणा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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