संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के मनरेगा कर्मियों की लंबित समस्याओं और आठ माह से बकाया मानदेय को लेकर उत्तर प्रदेश मनरेगा कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष प्रदीप पांडेय ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा कि जुलाई 2025 से मानदेय और ईपीएफ का भुगतान न होना केवल विभागीय शिथिलता नहीं, बल्कि कर्मचारियों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का हनन है।
जिलाध्यक्ष ने बताया कि संत कबीर नगर में ग्राम रोजगार सेवक, कंप्यूटर ऑपरेटर, तकनीकी सहायक और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों ने दिन-रात मेहनत कर जनपद के लक्ष्यों को पूरा किया है। विभागीय कार्यों के साथ-साथ एसआईआर और क्रॉप सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई है। इसके बावजूद प्रशासनिक मद से कर्मचारियों का भुगतान लंबित है, जो वित्तीय अनियमितता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि बीती दीपावली और अब होली जैसे प्रमुख पर्व भी बिना वेतन के बीत रहे हैं, जिससे कर्मियों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक तंगी के कारण कर्मचारी मानसिक तनाव और पारिवारिक दबाव में हैं।
जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही लंबित मानदेय और ईपीएफ देयता का निस्तारण नहीं किया गया, तो जनपद के सभी मनरेगा कर्मी कार्य करने में असमर्थ होंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
उनके अनुसार संगठन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूरे मामले से अवगत कराने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने मांग की कि संत कबीर नगर सहित अन्य प्रभावित जनपदों के मनरेगा कर्मियों की फाइलों का तत्काल निस्तारण किया जाए, ताकि कर्मचारियों को उनका बकाया पारिश्रमिक मिल सके।
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