अल्पसंख्यकों की भागीदारी और जमात का उभार: चुनाव 2026 के बड़े संकेत

बांग्लादेश चुनाव 2026: BNP की ऐतिहासिक वापसी, तारिक रहमान की अगुवाई में सत्ता परिवर्तन से साउथ एशिया में नई हलचल


बांग्लादेश चुनाव 2026 के नतीजों ने न केवल ढाका बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। लगभग दो दशक बाद Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने ज़बरदस्त वापसी करते हुए 13वें संसदीय चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। तारिक रहमान के नेतृत्व में BNP ने 299 में से 212 सीटों पर जीत दर्ज की है, जिससे यह साफ हो गया है कि जनता ने सत्ता परिवर्तन के पक्ष में निर्णायक जनादेश दिया है।
प्रख्यात बांग्लादेशी अख़बार द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, यह जीत न सिर्फ राजनीतिक बदलाव का संकेत है बल्कि लंबे समय से जारी अस्थिरता के बाद देश में नई दिशा तय करने वाली मानी जा रही है। बांग्लादेश चुनाव 2026 के नतीजों पर भारत, पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका सहित पूरे साउथ एशिया की नजर बनी हुई है।

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🟠 जमात-ए-इस्लामी का उभार: नया विपक्ष
इस चुनाव की एक और बड़ी कहानी रही Jamaat-e-Islami Bangladesh का उभार। वर्षों तक हाशिए पर रही जमात ने 77 सीटें जीतकर खुद को मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित कर लिया है। खासतौर पर ढाका की 15 में से 6 सीटों पर जीत ने उनकी शहरी पकड़ को उजागर किया है।
हालांकि, महिलाओं के अधिकार और रूढ़िवादी नीतियों को लेकर जमात के पुराने रुख के कारण वह BNP को सत्ता की दौड़ में पछाड़ नहीं सकी। बावजूद इसके, जमात ने चुनाव नतीजों में देरी और कथित धांधली के आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है।

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🟢 अल्पसंख्यकों की भागीदारी ने खींचा वैश्विक ध्यान
बांग्लादेश चुनाव 2026 में अल्पसंख्यक समुदाय की भागीदारी पर पूरी दुनिया की नजर थी। इस लिहाज से BNP का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले चार अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर संसद में जगह बनाई।
गयेश्वर चंद्र रॉय ने ढाका-3 सीट से जमात के शाहीनूर इस्लाम को 15,000 से अधिक मतों से हराया।
नितई रॉय चौधरी ने मगुरा-2 सीट से कंफर्टेबल जीत दर्ज की और वे BNP में अल्पसंख्यकों का बड़ा चेहरा माने जा रहे हैं।
एडवोकेट दीपेन देवान ने रांगामाटी संसदीय सीट से जीत हासिल की।
इसके अलावा सचिंग प्रू ने बंदरबन निर्वाचन क्षेत्र से BNP के लिए एक और सीट जोड़ी।
वहीं, जमात-ए-इस्लामी की ओर से एकमात्र हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी को हार का सामना करना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पसंख्यकों की यह जीत BNP के समावेशी राजनीतिक संदेश को मजबूती देती है।
🔵 ऐतिहासिक जनमत संग्रह: संविधान में बड़े बदलाव
चुनाव के साथ-साथ हुए जनमत संग्रह ने बांग्लादेश चुनाव 2026 को और भी ऐतिहासिक बना दिया। चुनाव आयोग के अनुसार, करीब 4.8 करोड़ मतदाताओं ने संविधान सुधारों के पक्ष में ‘हां’ में वोट दिया, जबकि 2.25 करोड़ लोगों ने ‘ना’ कहा।
इन सुधारों के तहत:कोई भी व्यक्ति 10 साल से अधिक समय तक प्रधानमंत्री नहीं रह सकेगा। न्यायपालिका को अधिक स्वतंत्रता दी जाएगी।
दो सदनों वाली संसद (Bicameral Parliament) के गठन का रास्ता साफ हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये सुधार भविष्य में सत्ता के केंद्रीकरण को रोकने और लोकतंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
🟣 अवामी लीग का बाहर होना और सत्ता परिवर्तन
अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलनों के बाद Awami League को चुनाव लड़ने से बैन कर दिया गया था। इसका सीधा फायदा BNP और जमात को मिला। लंबे समय से सत्ता में रही अवामी लीग के बाहर होने से मतदाताओं के पास स्पष्ट विकल्प मौजूद था, जिसका असर नतीजों में साफ दिखा।
🔴 मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार और आगे का रास्ता
नोबेल विजेता Muhammad Yunus की अंतरिम सरकार अब सत्ता औपचारिक रूप से तारिक रहमान को सौंपने की तैयारी में है। तारिक रहमान फिलहाल प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं।
भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी तारिक रहमान को जीत की बधाई दी है और उम्मीद जताई है कि भारत-बांग्लादेश संबंध और मजबूत होंगे। यह संदेश दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्थिरता का संकेत माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश चुनाव 2026 केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक सुधार, अल्पसंख्यक भागीदारी और क्षेत्रीय राजनीति में नए संतुलन का संकेत देता है। आने वाले महीनों में तारिक रहमान की सरकार किन नीतियों पर आगे बढ़ती है, इस पर न सिर्फ बांग्लादेश बल्कि पूरा दक्षिण एशिया नजर बनाए रखेगा।

Editor CP pandey

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