शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)
अवैध खनन के लिए मंझा,बेलाखेडा व साहबगंज की सीमा बालू मिट्टी के माफियाओं के लिए मुफीद साबित हो रही है। यही कारण है कि गांव के आसपास बड़ी मात्रा में खनन किया जा रहा है। हालाकि नदी के किनारे जाने के लिए मार्ग न होने पर इन्हें किसानों की खेतों का सहारा लेना पड़ता है और चंद पैसों की लालच में ये किसान अपने खेत से मार्ग बनवा देते हैं। तथा खेतों की मिट्टी भी उठवा देते है। ऐसा भी नहीं कि अधिकारियों को इसकी भनक नहीं लगती, मगर सब कुछ होने के बाद भी वह मौन बने रहते हैं।
छापेमारी से पहले मिलती जानकारी, छिपा दी जाती हैं मशीनें
ग्रामीण बताते हैं कि जिस दिन छापेमारी होने होती है। उसकी सूचना पहले ही यहां आ जाती है। इस दौरान खनन करने वाले अपनी मशीने छिपाकर यहां से चले जाते हैं।
मझा, साहबगंज व बांधमार्ग से निकालती है ओवरलोड मिट्टी व बालू की ट्रालियां
अवैध खनन के दौरान वाहनों में जब ओवरलोडिंग की जाती है तो चालक इन वाहनों को लेकर साहबगंज व बांधमार्ग मंझा गांव से होते हुए निकलते हैं। वाहन ग्राम मंझा व साहबगंज के किसानों के खेतों से होकर गुजरते हैं। इसी प्रकार बांध मार्ग में माफिया ने किसानों के खेतों से रास्ता बना लिया है। कुछ दिन पूर्व बनी सडक फिर खराब होने लगी है बर्षो मे एक बार सडक का निर्माण हो पाता है और एक महीने मे ही संडक की दुर्दशा कर दी जाती है। वही साहबगंज के चकरोडो की हालत पहले ही खराब हो चुकी है जो बची वह खराब हो रही है
बैध है तो दिन की जगह रात्री मे ही क्यो होता खनन
माना कमाई का साधन है खनन मिट्टी और बालू का खनन बैध भी है और कमाई का जरिया भी हो तो सरकार को फ्री कर देना चाहिए रौक लगने के बाद से अवैध है अवैध के कारण ही रात्री मे ट्रेक्टर गर्जते है दस खनन माफिया ओ मे से चार पर मुकदमा बाकी सभी आजाद है इसलिए कमाई का मुख्य साधन है खनन इसलिए क्षेत्रीय माफियाओं का कुछ लोगो से ताल मेल और बिजनेस चालू इन दिनो बांध मार्ग और साहबगंज से गुजरने बाले ट्रेक्टर दो लोगो के संरक्षण मे चल रहे है।
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