——X——
देखो कितने पानी में हैं हम,
देखो कितने बिके हुये हैं हम,
इनको उनको सबको छोड़ो,
अपनी नियति तो देखें हम,
देखो कितने बिके हुए हैं हम।
प्रिंट मीडिया टेलीविज़न,
चौथा स्तंभ सबका है ग़म,
नहीं सहारा इनका माँगो,
इनमें भी अब नहीं है दम,
देखो कितने बिके हुये हैं हम।
स्वयं संघर्ष हमें करना है,
और किसी को नहीं देखना है,
किसी को कुछ भी नहीं पता है,
मध्यम वर्ग की जनता हैं हम,
देखो कितने बिके हुये हैं हम।
खबर नहीं दलालों की हैं,
खबर नहीं धनवानों की हैं,
कुत्ते और साँड़ नहीं दिखते हैं,
बेरोजगारी महँगाई का मातम,
देखो कितने बिके हुये हैं हम।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
जाति-पाँति में दिखे भलाई,
नेक इरादे हैं नहीं किसी के,
आदित्य राजनीति के फूटे बम,
देखो कितने बिके हुये हैं हम।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र आदित्य
वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज सर्किट हाउस, बनारस में आयोजित जनता दर्शन…
नोएडा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) आज बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल का केंद्र बनने जा…
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर में शुक्रवार रात…
दरभंगा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जिले से सामने आया विभा कुमारी हत्याकांड पूरे समाज को…
पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस के एक कार्यकर्ता द्वारा मंच…
बलिया(राष्ट्र की परम्परा) यूपी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बलिया जिले से एक ऐसे…