21 जनवरी को हुए महत्वपूर्ण निधन: इतिहास के अमर नाम

मृणालिनी साराभाई (निधन: 21 जनवरी 2016)
मृणालिनी साराभाई भारत की महान शास्त्रीय नृत्यांगना, कोरियोग्राफर और सांस्कृतिक चिंतक थीं। उन्होंने भरतनाट्यम और कथकली को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई। वे प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की पत्नी थीं और “दर्पण अकादमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स” की संस्थापक रहीं। मृणालिनी जी ने नृत्य को केवल कला नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सम्मानों से अलंकृत मृणालिनी साराभाई भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में प्रेरणास्रोत के रूप में सदैव स्मरणीय रहेंगी।

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विष्णु राम मेधी (निधन: 21 जनवरी 1981)
विष्णु राम मेधी भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और असम के दूसरे मुख्यमंत्री थे। वे गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित थे और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। प्रशासनिक कुशलता, सादगी और ईमानदारी उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने असम के सामाजिक और आर्थिक विकास पर विशेष ध्यान दिया। मेधी जी राज्यपाल भी रहे और राष्ट्रीय राजनीति में सम्मानित स्थान प्राप्त किया। उनका जीवन सार्वजनिक सेवा, त्याग और राष्ट्रनिर्माण का आदर्श उदाहरण माना जाता है।
शिवपूजन सहाय (निधन: 21 जनवरी 1963)
शिवपूजन सहाय हिन्दी साहित्य के सशक्त स्तंभ थे। वे उपन्यासकार, कहानीकार, संपादक और पत्रकार के रूप में प्रसिद्ध रहे। उनकी रचनाओं में ग्रामीण भारत, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं का सजीव चित्रण मिलता है। ‘देहाती दुनिया’ उनका चर्चित उपन्यास है, जिसने हिन्दी गद्य को नई दिशा दी। साहित्य के साथ-साथ पत्रकारिता में भी उन्होंने निर्भीक लेखन किया। शिवपूजन सहाय का योगदान हिन्दी साहित्य के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण और स्थायी माना जाता है।
रास बिहारी बोस (निधन: 21 जनवरी 1945)
रास बिहारी बोस एक प्रख्यात वकील, शिक्षाविद और राष्ट्रवादी विचारक थे। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के बौद्धिक पक्ष को मजबूत करने वाले व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। कानून और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने युवाओं में राष्ट्रप्रेम और आत्मसम्मान की भावना को जाग्रत किया। बोस जी का जीवन अनुशासन, अध्ययन और देशहित के प्रति समर्पण का प्रतीक था। उनका निधन भारतीय बौद्धिक समाज के लिए अपूरणीय क्षति माना गया।

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ज्ञान चंद्र घोष (निधन: 21 जनवरी 1959)
ज्ञान चंद्र घोष भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और अनुसंधानकर्ता थे। वे भौतिक विज्ञान और औद्योगिक अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी रहे। भारत में वैज्ञानिक संस्थानों की स्थापना और अनुसंधान संस्कृति को मजबूत करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद से जुड़े रहे और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया। ज्ञान चंद्र घोष का जीवन विज्ञान, नवाचार और राष्ट्रहित के लिए समर्पित रहा, जिससे आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा लेती रहेंगी।
जॉर्ज ऑरवेल (निधन: 21 जनवरी 1950)
जॉर्ज ऑरवेल विश्वप्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक, निबंधकार और पत्रकार थे। ‘एनिमल फार्म’ और ‘नाइन्टीन एटी-फोर’ जैसी कृतियों ने उन्हें अमर बना दिया। उनके लेखन में तानाशाही, सत्ता, सामाजिक असमानता और स्वतंत्रता जैसे विषयों की गहरी पड़ताल मिलती है। ऑरवेल की रचनाएं आज भी वैश्विक राजनीति और समाज को समझने में प्रासंगिक हैं। उनका साहित्य विचारोत्तेजक, यथार्थवादी और चेतना जागृत करने वाला माना जाता है।

Editor CP pandey

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