भारतीय व विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण निधन

अरुण वर्मा (निधन: 20 जनवरी 2022)
अरुण वर्मा हिन्दी सिनेमा के चर्चित अभिनेता और कॉमेडियन थे। उन्होंने सहायक और हास्य भूमिकाओं में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी सहज अभिनय शैली, सटीक टाइमिंग और आम आदमी से जुड़ा हास्य दर्शकों को खासा पसंद आता था। कई फिल्मों और टीवी प्रोजेक्ट्स में काम कर उन्होंने मनोरंजन जगत में योगदान दिया। उनका निधन हिन्दी फिल्म उद्योग के लिए एक सादे लेकिन प्रभावशाली कलाकार की क्षति माना जाता है।
एरिक सेगल (निधन: 20 जनवरी 2010)
एरिक सेगल विश्वप्रसिद्ध अमेरिकी लेखक, उपन्यासकार और पटकथा लेखक थे। उनका उपन्यास “लव स्टोरी” वैश्विक स्तर पर अपार लोकप्रिय हुआ, जिस पर बनी फिल्म भी ऐतिहासिक हिट रही। सेगल ने साहित्य और सिनेमा दोनों में भावनात्मक अभिव्यक्ति को नई ऊंचाई दी। उनका निधन आधुनिक रोमांटिक साहित्य के एक युग का अंत माना जाता है।
परवीन बॉबी (निधन: 20 जनवरी 2005)
परवीन बॉबी 1970–80 के दशक की ग्लैमरस और सशक्त भारतीय अभिनेत्री थीं। उन्होंने महिला किरदारों को आधुनिकता, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता की नई पहचान दी। अमिताभ बच्चन व धर्मेंद्र जैसे सितारों के साथ उनकी फिल्में बेहद सफल रहीं। उनका निधन हिन्दी सिनेमा की एक बोल्ड और प्रभावशाली कलाकार की स्मृति छोड़ गया।
रामेश्वर नाथ काव (निधन: 20 जनवरी 2002)
रामेश्वर नाथ काव भारत की गुप्तचर संस्था रॉ (RAW) के संस्थापक थे। उन्होंने भारत की बाह्य खुफिया नीति को संगठित और सुदृढ़ किया। राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान ऐतिहासिक माना जाता है। पर्दे के पीछे रहकर देश सेवा करने वाले काव का निधन भारतीय खुफिया तंत्र के लिए बड़ी क्षति था।

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करम सिंह (निधन: 20 जनवरी 1993)
लांस नायक करम सिंह परमवीर चक्र से सम्मानित वीर सैनिक थे। उन्होंने भारत-पाक युद्ध में अद्वितीय साहस, नेतृत्व और बलिदान का परिचय दिया। उनका नाम भारतीय सैन्य इतिहास में सर्वोच्च वीरता के प्रतीक के रूप में दर्ज है। उनका निधन देश के लिए गर्व के एक अमर अध्याय की स्मृति है।
बिन्देश्वरी दुबे (निधन: 20 जनवरी 1993)
बिन्देश्वरी दुबे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में सक्रिय राजनीति की। प्रशासनिक अनुभव और सादगी उनकी पहचान थी। उनका निधन बिहार की राजनीति में एक अनुभवी नेता की कमी के रूप में देखा गया।
ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान (निधन: 20 जनवरी 1988)
भारत रत्न से सम्मानित ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान महान स्वतंत्रता सेनानी और अहिंसा के प्रबल समर्थक थे। उन्हें “सीमांत गांधी” कहा जाता है। उन्होंने पठान समाज में अहिंसक आंदोलन को मजबूत किया। उनका निधन स्वतंत्रता आंदोलन की नैतिक विरासत का अपूरणीय क्षण था।
मलिक खिज़ार हयात तिवाना (निधन: 20 जनवरी 1975)
मलिक खिज़ार हयात तिवाना पंजाब के प्रभावशाली राजनेता, सैन्य अधिकारी और ज़मींदार थे। उन्होंने औपनिवेशिक काल में प्रशासनिक व राजनीतिक भूमिकाएं निभाईं। उनका जीवन तत्कालीन भारतीय राजनीति और सैन्य इतिहास को समझने का महत्वपूर्ण संदर्भ है।
अंजलाई अम्मल (निधन: 20 जनवरी 1961)
अंजलाई अम्मल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थीं। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई और सामाजिक चेतना को बल दिया। महिला स्वतंत्रता सेनानियों में उनका योगदान प्रेरणादायक माना जाता है।
तेज बहादुर सप्रू (निधन: 20 जनवरी 1959)
तेज बहादुर सप्रू प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, विधिवेत्ता और संवैधानिक मामलों के जानकार थे। उन्होंने राजनीतिक सुधारों और संवैधानिक विमर्श में अहम भूमिका निभाई।
हरविलास शारदा (निधन: 20 जनवरी 1955)
हरविलास शारदा शिक्षाविद, समाज सुधारक, न्यायविद और लेखक थे। उन्होंने शिक्षा और सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
ठक्कर बाप्पा (निधन: 20 जनवरी 1951)
ठक्कर बाप्पा समाजसेवा और जनकल्याण के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने आदिवासी और पिछड़े वर्गों के उत्थान हेतु आजीवन कार्य किया।
डेविड गैरिक (निधन: 20 जनवरी 1779)
डेविड गैरिक अंग्रेज़ अभिनेता और मंच संचालक थे। उन्होंने आधुनिक रंगमंच की अभिनय शैली को नई दिशा दी और थिएटर को लोकप्रिय बनाया।

Editor CP pandey

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