संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से एकलव्य चेरिटेबल एवं एजुकेशनल ट्रस्ट, मगहर के तत्त्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ब्रज लोकगीत उत्सव का समापन सांस्कृतिक उल्लास के बीच हुआ।
कार्यक्रम में ब्रज क्षेत्र की लोकधुनों और गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाल कलाकार रिया व विशाखा ने “बांसुरी बन के…” और “कान्हा तुझको मजा चखाऊं” गीत प्रस्तुत कर तालियाँ बटोरीं। वहीं अंशू, आंचल, विशाखा, रिया, अनुष्का, अंजनी, अर्पिता, अन्वी, रमा व दिव्यांशी ने ब्रज की होली का मंचन कर उत्सव को रंगीन बना दिया।
लोक कलाकारों में सूर्यभान, अब्दुल कलाम, रुआब अली, मोहम्मद खलील, मेहंदी हसन व तबरक हुसैन समेत अन्य कलाकारों ने भी ब्रज गीतों से वातावरण को लोकधर्मी बना दिया।
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. सुधांशु अणु नाभ मिश्रा ने कहा कि ब्रज की लोकपरंपरा भारत की सांस्कृतिक आत्मा है। लोकगीत समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी विरासत का बोध कराते हैं।
आयोजक एवं मुख्य ट्रस्टी गौरव निषाद ने बताया कि उत्सव का उद्देश्य लोककला को संरक्षण व राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय का सहयोग ग्रामीण कलाकारों के लिए बड़ी उपलब्धि है।
कार्यक्रम का संचालन अत्रेश श्रीवास्तव ने किया। दो दिवसीय आयोजन में विद्यार्थियों, स्थानीय लोगों और सांस्कृतिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी रही। दर्शकों ने ऐसे आयोजनों को संस्कृति संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
ब्रज लोकगीत उत्सव ने साबित किया कि लोकसंगीत मनोरंजन ही नहीं, बल्कि समाज व संस्कृति को जोड़ने का साधन है।
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