गोंडा/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में ऋण वितरण के नाम पर एक बड़े बैंकिंग घोटाले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि 205 खाताधारकों के ऋण खातों और पांच आंतरिक खातों से कुल 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये की भारी वित्तीय अनियमितता की गई। इस मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक, बैंककर्मी और खाताधारकों सहित 16 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की बड़गांव शाखा से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की बड़गांव शाखा से जुड़ा है। बैंक के मुख्य प्रबंधक भुवन चंद्र सती ने इस घोटाले की शिकायत पुलिस अधीक्षक गोंडा विनीत जायसवाल से की थी।
आंतरिक जांच टीम की रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि होने के बाद नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई।
संगठित गिरोह बनाकर किया गया फर्जीवाड़ा
शिकायत और जांच में सामने आया कि आरोपियों ने संगठित गिरोह बनाकर फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बिना पात्रता और आवश्यक सत्यापन के ऋण स्वीकृत किए।
तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल पर आरोप है कि उन्होंने स्वयं और अपने परिजनों को तथाकथित “सिंडिकेट” में शामिल कर नियमों को दरकिनार करते हुए ऋण मंजूर किए।
केवाईसी और भौतिक सत्यापन के बिना लोन
जांच में पाया गया कि ऋण स्वीकृति से पहले न तो केवाईसी दस्तावेज पूरे किए गए और न ही खाताधारकों का भौतिक सत्यापन कराया गया। इसके बाद खाताधारकों के खातों से धनराशि निकालकर अपने और करीबी लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
एनपीए से बचाने के लिए किया गया खेल
आरोप है कि खातों को एनपीए (Non-Performing Asset) घोषित होने से बचाने के लिए अन्य खातों से राशि निकालकर किस्तें जमा कराई गईं, ताकि बैंक मुख्यालय को अनियमितता की जानकारी न हो सके।
इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
नगर कोतवाली पुलिस ने जिन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, उनमें—
पवन कुमार पाल (तत्कालीन शाखा प्रबंधक), अजय कुमार (तत्कालीन प्रबंधक), सुशील कुमार गौतम (तत्कालीन सहायक कैशियर) सहित खाताधारक सुमित्रा पाल, संजना सिंह, राज प्रताप सिंह, जय प्रताप सिंह, फूल मोहम्मद, राघव राम, शिवाकांत वर्मा, रितेंद्र पाल, गीता देवी वर्मा, दुष्यंत प्रताप सिंह, मोहम्मद असलम और प्रतीक कुमार सिंह शामिल हैं।
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9 लाख के लोन को 31 लाख दिखाने का आरोप
बहलोलपुर निवासी शिवेंद्र दुबे ने आरोप लगाया कि उन्होंने मकान निर्माण के लिए 9 लाख रुपये का होम लोन लिया था और नियमित किस्तें जमा कर रहे थे। बाद में उन्हें पता चला कि उनके खाते में कथित तौर पर 31 लाख रुपये का लोन दर्ज कर दिया गया है।
उनका आरोप है कि 9 लाख के लोन को 3 लाख दिखाकर शेष राशि का गबन कर लिया गया और शिकायत करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
जांच क्राइम इंस्पेक्टर को सौंपी गई
नगर कोतवाली गोंडा में दर्ज प्राथमिकी की जांच क्राइम इंस्पेक्टर सभाजीत सिंह को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य नाम सामने आते हैं तो उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा।
गौरतलब है कि इसी शाखा से जुड़े 21 करोड़ रुपये के फर्जी लोन मामले में पहले ही मुकदमा दर्ज हो चुका है, जबकि अब एक और केस दर्ज होने से बैंकिंग महकमे में हड़कंप मच गया है।
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