नासिक(राष्ट्र की परम्परा)
कूड़ा बीनने वाले, बेघरों, लावारिसो और भिखारियों के पास आधार कार्ड या कोई प्रमाण नहीं है, इसलिए उन्हें सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हनुमानबाड़ी में कूड़ा बीनने गया एक व्यक्ति आग की चपेट में आकर झुलस गया, उपचार न होने के कारण वह हनुमानवाड़ी बस अड्डे पर शरण ले रहा था, जैसे-जैसे उसकी चोट बढ़ती गई पड़ोसियों ने घटना की जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट सुरेश अवध को दी, जिन्होंने उक्त कचरा वाले को तुरंत इलाज के लिए सरकारी अस्पताल भेजा, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि वहां के डॉक्टरों और नर्सों ने इनकार कर दिया। मरीज को भर्ती करने पहुंचे अधिवक्ता सुरेश अवध ने अस्पताल जाकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया, चेतावनी मिलते ही अधिकारी जागे और मरीज को भर्ती कर इलाज शुरू किया।
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