📰 12 फ़रवरी को हुए प्रमुख निधन का ऐतिहासिक विवरण
भारत और विश्व इतिहास में 12 फ़रवरी को हुए निधन कई ऐसे महान व्यक्तित्वों से जुड़े हैं, जिन्होंने राजनीति, उद्योग, राष्ट्रवाद और शासन व्यवस्था में अमिट छाप छोड़ी। यह दिन इतिहास के पन्नों में विशेष स्थान रखता है।
🔹 राहुल बजाज (निधन: 12 फ़रवरी 2022)
राहुल बजाज भारत के सबसे सफल उद्योगपतियों में गिने जाते थे। बजाज ऑटो को वैश्विक पहचान दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही। उनके नेतृत्व में बजाज समूह ने टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेक्टर में क्रांति ला दी।
राहुल बजाज का निधन 12 फ़रवरी को हुए प्रमुख निधन में आधुनिक भारत के औद्योगिक युग की एक बड़ी क्षति माना जाता है।
🔹 गोपी कुमार पोदिला (निधन: 12 फ़रवरी 2010)
गोपी कुमार पोदिला एक प्रसिद्ध विद्वान और भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक थे। विज्ञान और शोध के क्षेत्र में उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
12 फ़रवरी को हुए निधन में उनका नाम अकादमिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति के रूप में दर्ज है।
🔹 सूफ़ी अम्बा प्रसाद (निधन: 12 फ़रवरी 1919)
सूफ़ी अम्बा प्रसाद एक प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आवाज उठाई।
12 फ़रवरी को हुए प्रमुख निधन में उनका योगदान आज भी प्रेरणास्रोत माना जाता है।
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🔹 नवाब सैयद मोहम्मद बहादुर (निधन: 12 फ़रवरी 1919)
नवाब सैयद मोहम्मद बहादुर एक प्रमुख भारतीय राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने 1913 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची सम्मेलन की अध्यक्षता की थी।
12 फ़रवरी को हुए निधन में उनका नाम भारतीय राजनीतिक इतिहास में विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है।
🔹 लॉर्ड डफ़रिन (निधन: 12 फ़रवरी 1902)
लॉर्ड डफ़रिन लॉर्ड रिपन के बाद भारत के वायसराय बने। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक सुधार और साम्राज्यवादी नीतियों का विस्तार हुआ।
12 फ़रवरी को हुए प्रमुख निधन में वे ब्रिटिश भारत के महत्वपूर्ण शासकों में गिने जाते हैं।
🔹 महादजी शिन्दे (निधन: 12 फ़रवरी 1794)
महादजी शिन्दे रणोजी सिंधिया के उत्तराधिकारी थे और मराठा साम्राज्य के एक शक्तिशाली सेनानायक माने जाते थे। उत्तर भारत में मराठा प्रभाव स्थापित करने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।
12 फ़रवरी को हुए निधन मराठा इतिहास का एक निर्णायक मोड़ था।
🔹 जहाँदारशाह (निधन: 12 फ़रवरी 1713)
जहाँदारशाह, मुगल सम्राट बहादुरशाह प्रथम के पुत्रों में से एक थे। उनका शासनकाल अल्पकालिक रहा, लेकिन मुगल राजनीति में आंतरिक संघर्षों का प्रतीक माना जाता है।
12 फ़रवरी को हुए प्रमुख निधन में उनका नाम मुगल इतिहास से जुड़ा हुआ है।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)
प्रस्तुत ऐतिहासिक जानकारी विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों के गहन अध्ययन व छानबीन के आधार पर तैयार की गई है। फिर भी किसी प्रकार की त्रुटि या तथ्यात्मक भिन्नता के लिए हम 100 प्रतिशत प्रमाणित दावा नहीं करते और न ही किसी प्रकार की जिम्मेदारी लेते हैं।
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