नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। ज्यूडिशियल काउंसिल ने भारत सरकार से देशभर के सभी टोल प्लाज़ा पर अधिवक्ताओं को पूर्णतः टोल शुल्क से मुक्त करने की मांग उठाई है। इस संबंध में काउंसिल के चेयरमैन राजीव अग्निहोत्री ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भेजकर तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।
पत्र में कहा गया है कि अधिवक्ता न्याय प्रणाली के अभिन्न स्तंभ हैं, जो विधि के शासन को बनाए रखने, मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और नागरिकों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परिषद के अनुसार अधिवक्ताओं का कार्य केवल पेशा नहीं बल्कि संवैधानिक दायित्व है, जो लोकतंत्र और न्यायिक व्यवस्था के संचालन में सीधा योगदान देता है।
काउंसिल ने बताया कि अधिवक्ताओं को विभिन्न न्यायालयों में पेशी, मुवक्किलों से परामर्श और अन्य कानूनी कार्यों के लिए लगातार यात्रा करनी पड़ती है, कई बार कम समय के नोटिस पर भी। ऐसे में टोल शुल्क का भुगतान उनके लिए एक निरंतर आर्थिक बोझ बन जाता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
चेयरमैन अग्निहोत्री ने कहा कि टोल शुल्क से छूट मिलने पर अधिवक्ताओं की आर्थिक भार कम होगा और वे अधिक दक्षता से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे। इससे मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और न्याय व्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।
ज्यूडिशियल काउंसिल ने यह भी उल्लेख किया कि कई आवश्यक सेवाओं से जुड़े वर्गों को पहले से टोल में छूट मिलती है। ऐसे में न्याय प्रक्रिया के सुगम संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिवक्ताओं को भी यह सुविधा दी जानी चाहिए।
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए काउंसिल ने एक मानकीकृत पहचान प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया है, जैसे सत्यापित डिजिटल पास या आधिकारिक पहचान पत्र, जिसे मौजूदा टोल प्रणाली से जोड़ा जा सके।
काउंसिल ने मंत्री नितिन गडकरी से इस प्रस्ताव पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि यह कदम विधि समुदाय के लिए महत्वपूर्ण होगा और देश की न्याय व्यवस्था को मजबूत करेगा।
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