दो वर्षों से जेल में बंद वकील कृपा शंकर सिंह और कार्यकर्ता बिंदा सोना सिंह की रिहाई की मांग

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। कैम्पेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन (CASR) ने उत्तर प्रदेश में कथित “माओवादी संबंध” मामले में दो वर्षों से जेल में बंद एडवोकेट कृपा शंकर सिंह और कार्यकर्ता बिंदा सोना सिंह की लगातार हिरासत की कड़ी निंदा की है। संगठन ने दोनों की तत्काल रिहाई और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।

ATS ने 2024 में किया था गिरफ्तार

CASR के अनुसार, 5 मार्च 2024 को उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने उनके घरों पर छापा मारकर दोनों को 2019 के एक मामले में गिरफ्तार किया था।

एडवोकेट कृपा शंकर सिंह इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता हैं और लंबे समय से राजनीतिक बंदियों तथा हाशिए के समुदायों के मामलों में पैरवी करते रहे हैं। वहीं बिंदा सोना सिंह पूर्व शिक्षिका हैं और वर्तमान में निजी कानूनी टाइपिस्ट के रूप में काम करती हैं।

संगठन का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी यह दिखाती है कि “माओवादी संबंध” के आरोपों के तहत कई बार वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जाता है।

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हिरासत में बिगड़ा स्वास्थ्य

CASR का आरोप है कि दो वर्षों की हिरासत के दौरान दोनों का स्वास्थ्य लगातार खराब हुआ है।

संगठन के अनुसार कृपा शंकर सिंह को लंबे समय से एक अलग बैरक में रखा गया है, जिससे उन्हें मानसिक तनाव और मतिभ्रम जैसी समस्याएँ हो रही हैं। जेल के डॉक्टरों ने उन्हें हाइड्रोसील के ऑपरेशन की सलाह भी दी है, लेकिन अब तक इस पर कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हुई है।

वहीं बिंदा सोना सिंह को स्त्री-रोग संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में जेल परिसर में गिरने से उनके पैर में गंभीर मोच भी आ गई थी, जिसके बावजूद उन्हें अदालत में पेशी के लिए जाना पड़ा।

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जमानत याचिका पर नहीं हो पा रही सुनवाई

CASR का कहना है कि दोनों की जमानत याचिकाएं एक वर्ष से अधिक समय से उच्च न्यायालय में लंबित हैं। कई बार तारीख पड़ने के बावजूद सुनवाई नहीं हो पा रही है। संगठन का आरोप है कि इससे मुकदमे से पहले की हिरासत ही सजा में बदलती जा रही है।

CASR की मांगें

CASR ने सरकार और न्यायालय से चार प्रमुख मांगें रखी हैं—

  1. एडवोकेट कृपा शंकर सिंह और बिंदा सोना सिंह की तत्काल रिहाई
  2. दोनों को स्वतंत्र और उचित चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया जाए
  3. लंबित जमानत याचिकाओं की शीघ्र सुनवाई हो
  4. “माओवादी संबंध” के आरोपों के तहत लोकतांत्रिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगे

संगठन ने कहा कि बिना दोष सिद्ध हुए दो वर्षों तक जेल में रखना नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

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Karan Pandey

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