गया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) | ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी, जिन्होंने पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया था, उनका जीवन आज भी प्रेरणा का प्रतीक बना हुआ है। मगर विडंबना यह रही कि जिनके हौसले पत्थर को भी झुका दिए, उनके परिवार का मकान वर्षों से कच्चा ही रहा। दशकों बीत गए, कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन दशरथ मांझी के परिवार को पक्के घर की सौगात नहीं मिल सकी।
हालांकि, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सांकेतिक रूप से मांझी को ‘सीएम की कुर्सी’ पर बैठाकर सम्मान तो जरूर दिया, परंतु उनके परिवार की बुनियादी जरूरत—एक पक्का मकान—अब तक पूरी नहीं हो सकी थी। न तो लालू यादव, न नीतीश कुमार और न ही पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी जैसे नेताओं ने दशरथ मांझी के परिवार के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में ठोस प्रयास किया।
लेकिन अब, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस ऐतिहासिक चूक को सुधारने की पहल की है। कुछ महीने पहले राहुल गांधी गया दौरे पर थे, जहां उन्होंने ‘माउंटेन मैन’ के पुत्र भगीरथ मांझी से मुलाकात की। वहां उन्होंने मांझी परिवार की दयनीय स्थिति देखी और वादा किया, “आपके लिए पक्का घर हमारी ओर से बनेगा।”
राहुल गांधी ने दिल्ली लौटते ही इस वादे को निभाने की ठानी और जरूरी कदम उठाए। उनकी पहल पर अब गया जिले के गहलौर गांव में दशरथ मांझी के परिजनों के लिए पक्का मकान निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। निर्माण कार्य की तस्वीरें और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि दशरथ मांझी के परिवार के लिए यह एक ऐतिहासिक पल है।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि “आज दशरथ मांझी जी होते, तो जरूर मुस्कराते। वर्षों बाद किसी ने हमारी पीड़ा को समझा और उसे दूर करने का प्रयास किया।” गांव के लोग भी इस पहल की सराहना कर रहे हैं और इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम बता रहे हैं।
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