पटना, सोमवार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)
बिहार की सियासत में अब चुनावी गहमागहमी का दौर शुरू होने वाला है। निर्वाचन आयोग सोमवार शाम 4 बजे बहुप्रतीक्षित बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों की घोषणा करेगा। आयोग का संवाददाता सम्मेलन नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में होगा, जहाँ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी राज्य में चुनावी तैयारियों की समीक्षा के बाद विस्तृत कार्यक्रम जारी करेंगे।
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। इसी के साथ सूबे की राजनीति में नए समीकरण और रणनीतियों का दौर फिर शुरू हो गया है। राजनीतिक दलों ने आयोग से आग्रह किया है कि चुनाव छठ पर्व के तुरंत बाद, यानी अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह में कराए जाएँ, ताकि बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाता भी मतदान में हिस्सा ले सकें।
🔸 त्योहारों के बीच संतुलन साधेगा चुनाव आयोग
सूत्रों के अनुसार, इस बार आयोग छठ (18 से 28 अक्टूबर) और दिवाली के बीच पड़ने वाले उत्सवों को ध्यान में रखते हुए तिथियों का निर्धारण करेगा। संभावना है कि मतदान की प्रक्रिया एक से अधिक चरणों में होगी, जैसा कि 2020 में हुआ था।
🔹 2025 में कौन किसके मुकाबले में
राजनीतिक समीकरण एक बार फिर दिलचस्प हैं। सत्ता पक्ष में भाजपा-जदयू गठबंधन है, जबकि विपक्ष में राजद-कांग्रेस महागठबंधन अपनी ताकत आजमाने उतरेगा। वहीं, चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर भी अपनी जन सुराज पार्टी के साथ मैदान में उतरने को तैयार हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।
🔸 2020 के चुनाव का संदर्भ
2020 का विधानसभा चुनाव कोविड-19 महामारी की पृष्ठभूमि में देश का पहला बड़ा चुनाव था।
तीन चरणों में मतदान —
28 अक्टूबर,
3 नवंबर,
7 नवंबर — को हुआ था।
परिणाम 10 नवंबर 2020 को घोषित हुए, जिसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को 125 सीटों पर जीत मिली, जबकि महागठबंधन को 110 सीटों से संतोष करना पड़ा।
🔹 2025 का चुनाव: मुद्दे, मतदाता और माहौल
इस बार बिहार में रोजगार, शिक्षा, महंगाई, किसानों की स्थिति और युवाओं का पलायन प्रमुख चुनावी मुद्दे रहेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में जनता की भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर बढ़ सकती है, क्योंकि त्योहारी सीजन के कारण लाखों प्रवासी मतदाता घर लौटेंगे।
🔸 क्या कहता है राजनीतिक विश्लेषण
राजनीति विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आयोग ने मतदान की तारीखें छठ पर्व के बाद रखीं, तो मतदान प्रतिशत 2020 की तुलना में 5–7% तक बढ़ सकता है। साथ ही, नई तकनीक और मतदाता सूची के अद्यतन से पारदर्शिता और सहभागिता दोनों में वृद्धि होगी।
🔹 मुख्य चुनाव आयुक्त बोले — “उत्सव लोकतंत्र का, जिम्मेदारी सबकी”
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार जैसे जनसंख्या बहुल राज्य में चुनाव कराना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन आयोग इसके लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा,
“यह लोकतंत्र का उत्सव है। आयोग का उद्देश्य है कि हर मतदाता बिना भय, प्रलोभन या दबाव के मतदान कर सके।”
🔸 संभावित समयरेखा (अनुमानित)
चरण संभावित तारीख क्षेत्र
पहला चरण 1-5 नवंबर दक्षिण बिहार
दूसरा चरण 10-14 नवंबर उत्तरी बिहार
तीसरा चरण 17-20 नवंबर सीमांचल व कोसी क्षेत्र
इसे भी पढ़ें –भारतीय दंड संहिता 1860: एक ऐतिहासिक दृष्टि से समीक्षा
AI निर्मित आज का दिन कई राशियों के लिए आर्थिक प्रगति, व्यापारिक गतिविधियों और नए…
Aiनिर्मित हामिद अंसारी के बयान पर योगी का पलटवार, बोले- सनातन परंपरा को अपमानित करने…
गेहूं-धान के साथ सब्जी की खेती पर जोर, यूपी के किसानों को मिल सकता है…
शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। पूवायां थाना क्षेत्र के नथ्यापुर गांव में रविवार को अंतिम संस्कार…
बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर आवेदन की तारीख बदली, 4 अक्टूबर से भर सकेंगे फॉर्म…
उत्तराखंड बनेगा रोपवे हब, 160 किमी के 51 प्रोजेक्ट पर तेज हुआ काम देहरादून (राष्ट्र…