मजार के नाम फर्जी अभिलेख बनाने वालों पर मुकदमा दर्ज

एसडीएम कोर्ट के आदेश से निरस्त हुआ 30 साल पुराना फर्जी इंद्राज

विधायक की शिकायत के बाद प्रशासनिक जांच में सामने आया बड़ा घोटाला


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मजार भूमि घोटाला एक बार फिर उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। देवरिया जिले में सरकारी बंजर भूमि को मजार के नाम दर्ज कराने के मामले में तत्कालीन कानूनगो, लेखपाल समेत आधा दर्जन लोगों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई हल्का लेखपाल विनय सिंह की तहरीर पर की गई है।

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मामला देवरिया–गोरखपुर रोड पर स्थित अब्दुल गनी शाह बाबा की मजार से जुड़ा है, जो बीते कुछ समय से विवादों में रही है। जांच में यह सामने आया कि वर्ष 1993 में राजस्व ग्राम मेहड़ा, तप्पा धतूरा, परगना सिलहट की आराजी संख्या 1447/2 की बेशकीमती सरकारी बंजर भूमि को कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर वक्फ मजार/कब्रिस्तान के नाम दर्ज करा दिया गया था।

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इस देवरिया मजार भूमि घोटाला की शिकायत सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने जब अभिलेखों की गहन जांच कराई, तो शिकायत पूरी तरह सही पाई गई। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में जानबूझकर हेराफेरी की गई थी।
अतिक्रमण का मामला एसडीएम न्यायालय में पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान मजार कमेटी ने भी सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की बात स्वीकार कर ली। इसके बाद मजार को स्वयं ही तोड़ दिया गया। बीते 19 नवंबर को एसडीएम न्यायालय ने फर्जी इंद्राज को निरस्त करते हुए भूमि को पुनः सरकारी रिकॉर्ड में सही दर्ज कर दिया।

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लेखपाल की तहरीर के आधार पर पुलिस ने तत्कालीन सदर शहाबुद्दीन, नायब सदर इरशाद अहमद, नाजिम मुबारक अली, नायब नाजिर अरशद वारसी, तत्कालीन कानूनगो राधेश्याम उपाध्याय और लेखपाल रामानुज सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल एक जमीन का नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों की विश्वसनीयता से जुड़ा है। देवरिया मजार भूमि घोटाला में दोषियों पर सख्त कार्रवाई से भविष्य में इस तरह के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

Editor CP pandey

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