राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर जागरूकता अभियान तेज, युवाओं ने निभाई अहम भूमिका

औरैया(राष्ट्र की परम्परा)जनपद औरैया में न्यायिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए विकास भवन, ककोर परिसर में विधि छात्र-छात्राओं द्वारा राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 औरैया के अंतर्गत एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आमजनमानस को मध्यस्थता (मेडिएशन) और राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विवादों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण के लिए प्रेरित करना था।
यह आयोजन माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मयंक चौहान तथा जिलाधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी के निर्देशानुसार संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन तारकेश्वरी प्रसाद सिंह, प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण/सिविल जज (सी.डी.) के कुशल मार्गदर्शन में किया गया।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया गया कानूनी जागरूकता का संदेश
विकास भवन ककोर में आयोजित इस कार्यक्रम में लॉ विद्यार्थियों ने पूर्व अभ्यास और गहन तैयारी के बाद मंचन किया। नाटक की विषयवस्तु राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 औरैया तथा राष्ट्रीय लोक अदालत की उपयोगिता पर आधारित रही। छात्रों ने संवाद, अभिनय और सामाजिक परिस्थितियों के जीवंत चित्रण के माध्यम से यह संदेश दिया कि आपसी समझौते से विवादों का समाधान न केवल समय और धन की बचत करता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी मजबूत बनाता है।
नाटक में पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा के मामले, चेक बाउंस प्रकरण, मोटर दुर्घटना से संबंधित दावे, विद्युत विवाद, शमनीय आपराधिक प्रकरण और लघु प्रकृति के वादों जैसे विषयों को प्रमुखता से दर्शाया गया। इन सभी मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया गया, जिससे आम नागरिकों को कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं से राहत का मार्ग दिखाई दिया।
लंबित वादों के त्वरित निस्तारण पर जोर
राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 औरैया के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है। प्रभारी सचिव ने बताया कि मध्यस्थता की प्रक्रिया में दोनों पक्षों की सहमति से समाधान खोजा जाता है, जिससे रिश्तों में कड़वाहट कम होती है और न्यायिक प्रक्रिया का बोझ भी घटता है।
राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न प्रकार के मामलों का एक ही दिन में निस्तारण संभव होता है। इससे वादकारियों को वर्षों तक चलने वाली अदालती प्रक्रिया से मुक्ति मिलती है और न्याय सुलभ व सरल बनता है।
अधिकारियों एवं विधि शिक्षकों की उपस्थिति
इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी सतीश कुमार पाण्डेय, जिला पंचायत राज अधिकारी श्रीकान्त यादव, जिला समाज कल्याण अधिकारी रविन्द्र कुमार शशि, विनीता पाण्डेय (सदस्य, स्थायी लोक अदालत), हिमांशू दुबे, नेहा शुक्ला, प्रभा शुक्ला एवं अवधेश शुक्ला (प्रवक्ता, विधि कॉलेज) सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विधि छात्र-छात्राओं—पीयूष कुमार, मोनिका, मोना, पियूष सिंह, अभिषेक यादव, दिव्यांशी, वियोम, प्राची सिंह, मुस्कान, नाजिस, दीपिका राजपूत, शर्मिला, सरिता, प्रिया, वर्षा, अक्षिता, मासूम एवं अन्य विद्यार्थियों—ने सक्रिय भूमिका निभाई। उनके प्रभावशाली अभिनय और संवाद प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
युवा विधि छात्रों की सराहनीय पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 औरैया जैसे अभियानों में युवाओं की भागीदारी समाज में कानूनी साक्षरता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। विधि छात्रों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक ने यह स्पष्ट कर दिया कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद और समझौते के जरिए भी प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने विधि छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियां समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
आमजन से की गई अपील
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जनपदवासियों से अपील की गई कि जिनके मामले न्यायालयों में लंबित हैं, वे राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 औरैया के अंतर्गत अपने वादों को सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारित कराएं। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि सामाजिक रिश्तों में मधुरता भी बनी रहेगी।
मध्यस्थता प्रक्रिया पूर्णतः स्वैच्छिक और गोपनीय होती है। इसमें दोनों पक्षों की सहमति से समाधान निकाला जाता है, जिससे भविष्य में विवाद की संभावना कम हो जाती है।
न्याय सुलभ बनाने की दिशा में प्रभावी कदम
विकास भवन ककोर में आयोजित यह कार्यक्रम न्याय व्यवस्था को जनसुलभ और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ। राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 औरैया न केवल न्यायालयों के लंबित मामलों को कम करने का प्रयास है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय हित को भी सुदृढ़ करने का माध्यम है।
जनपद औरैया में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों से यह उम्मीद की जा रही है कि अधिक से अधिक लोग वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) की प्रक्रिया को अपनाएंगे और न्यायिक प्रणाली पर बढ़ते बोझ को कम करने में सहयोग करेंगे।

rkpNavneet Mishra

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