मनमानी किराया वसूली से जनता बेहाल, अधिकारियों की नजर नहीं–पनियरा-परतावल रोड पर जमकर वसूली
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। पनियरा से परतावल रूट पर ऑटो चालकों की मनमानी चरम पर है। महज 14–15 किलोमीटर की दूरी पर 50 रुपये किराया वसूला जा रहा है, जबकि सरकारी रेट 20 रुपये तय है। शिकायतें रोज उठ रहीं, लोग रोज लुट रहे, लेकिन जिम्मेदार विभाग की आंखें बंद होने से हालात और भी बेकाबू होते जा रहे।
सवारी नहीं, मजबूरी ले जा रहा ऑटो 50 रुपये दो और बैठो—कुछ इसी लहजे में ऑटो चालक सवारियों से बात कर रहे। किराया पूछने या कम करने की बात पर नोंक-झोंक, दुर्व्यवहार और धौंस आम बात बन गई है। आम जनता डर और झंझट से बचने के लिए मनमानी रेट देने पर मजबूर है।सड़क बनी,किराया बढ़ा — उलटी गिनती का हिसाब जब सड़क गड्ढों से भरी थी, तब 20 रुपये किराया लिया जाता था, लेकिन सड़क बनते ही किराया दोगुना से भी ज्यादा। यानी, सुविधा बढ़ने के नाम पर जनता की जेब काटने का खेल।
खतरे से भरा सफर — 10 से कम नहीं सवारी हकीकत यह है कि
किसी भी ऑटो में 10 से कम सवारियां नहीं होती। चालक अपनी सीट के दोनों ओर भी सवारी ठूंस लेते हैं,
भीड़-भाड़ के इस तरीके से संक्रमण फैलने और दुर्घटना होने का खतरा हमेशा बना रहता है।
अधिकारियों की सख्ती सिर्फ फाइलों मे होती है। बड़े अधिकारियों का दावा है कि 20 रुपये किराया अधिकृत है
मास्क व सीमित सवारी का नियम लागू है।स्टैंड से ऑटो खोलते समय नियमों की मॉनिटरिंग होती है।लेकिन जमीनी हकीकत साफ कर देती है कि न तो मॉनिटरिंग हो रही, न कार्रवाई।
दोनों रूटों पर रोजाना 3 दर्जन से ज्यादा ऑटो और ई-रिक्शा चलते हैं। हर वाहन अपनी मर्जी से किराया वसूल रहा। लॉक डाउन से पहले 20 रुपये में मिलने वाली सुविधा आज 50 रुपये में भी नहीं। जनता की मांग—नियम लागू करें, अवैध वसूली रोकी जाए।
लोगों का कहना है कि किराया तय कर सार्वजनिक कर दिया जाए हर स्टैंड पर पुलिस की नियमित निगरानी हो ओवरलोडिंग के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई हो।
जनता के शब्दों में—ऑटो चालकों की मनमानी यूं ही चलती रही तो आए दिन जेब भी कटेगी और जान का भी खतरा बना रहेगा।
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